
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की वार्षिक आम बैठक (AGM) 28 सितंबर को मुंबई में होने जा रही है और इसी के साथ बोर्ड के अध्यक्ष पद की दौड़ अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इस हाई-प्रोफाइल पद के लिए जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, उनमें पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली एक बार फिर सबसे आगे नजर आ रहे हैं। गांगुली इससे पहले भी 2019 से 2022 तक बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और उनकी वापसी की चर्चा अब जोर पकड़ने लगी है।
बीसीसीआई के निर्वाचन अधिकारी एके जोति द्वारा 19 सितंबर को जारी अंतिम मतदाता सूची में चार प्रमुख नाम शामिल हैं — सौरव गांगुली (बंगाल क्रिकेट संघ), हरभजन सिंह (पंजाब क्रिकेट संघ), रघुराम भट्ट (कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ), और जयदेव शाह (सौराष्ट्र क्रिकेट संघ)। इन सभी को न सिर्फ क्रिकेट का गहरा अनुभव है, बल्कि इनका प्रशासनिक दायरा भी बीसीसीआई में प्रभावी रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अगला अध्यक्ष क्रिकेट से जुड़ा हुआ कोई ऐसा चेहरा हो सकता है जो मैदान और मीटिंग रूम, दोनों को बखूबी समझता हो।
इस दौड़ में एक नया नाम किरण मोरे के रूप में सामने आया है। पूर्व विकेटकीपर और राष्ट्रीय चयनकर्ता रहे मोरे वर्तमान में बड़ौदा क्रिकेट संघ के सचिव हैं और मुंबई इंडियंस विमेंस टीम के जनरल मैनेजर के तौर पर भी जुड़े हुए हैं। हालांकि उन्हें अभी तक मतदाता सूची में राज्य प्रतिनिधि के रूप में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनका नामांकन हो सकता है। उनके पास मैदान और बोर्डरूम, दोनों का लंबा अनुभव है, जो उन्हें इस दौड़ में एक मजबूत दावेदार बनाता है।
इसी बीच कुछ समय पहले यह अटकलें भी सामने आई थीं कि महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर बीसीसीआई अध्यक्ष बनने में रुचि ले सकते हैं, लेकिन तेंदुलकर ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है और फिलहाल किसी भी प्रशासनिक पद की दौड़ से खुद को अलग रखा है।
सूत्रों के अनुसार, शीर्ष पद के लिए एक अनौपचारिक बैठक शनिवार को नई दिल्ली में होने की संभावना है, जहां संभावित उम्मीदवारों को लेकर अंतिम चर्चा की जाएगी। चुनाव की प्रक्रिया 20 सितंबर से शुरू होगी, जिसमें नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 23 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और अंतिम सूची जारी होगी। इसके बाद 28 सितंबर को वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान मतदान कराया जाएगा।
इस बार की AGM सिर्फ अध्यक्ष पद को लेकर ही अहम नहीं है, बल्कि इसमें नए राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की घोषणा भी की जाएगी। ऐसे में यह बैठक भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में एक नए अध्याय की शुरुआत करने वाली साबित हो सकती है। बीसीसीआई के इतिहास में यह समय बदलाव और नई दिशा तय करने का प्रतीक बनता जा रहा है, जिसमें पूर्व खिलाड़ी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।














