
इंडियन प्रीमियर लीग 2025 का खिताब जीतने के बाद जश्न के दौरान हुई दर्दनाक भगदड़ की घटना से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) गहरे शोक में है। 4 जून 2025 को हुए इस हादसे में 11 लोगों की जान गई थी और 33 से अधिक लोग घायल हुए थे। अब आरसीबी ने पीड़ित परिवारों के लिए 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। साथ ही फ्रेंचाइज़ी ने ‘आरसीबी केयर्स’ नामक सामाजिक पहल की भी शुरुआत की है।
आधिकारिक बयान जारी
टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा, “4 जून 2025 को हमारा दिल टूट गया। हमने आरसीबी परिवार के ग्यारह सदस्यों को खो दिया। वे केवल हमारे फैन ही नहीं, बल्कि हमारे शहर, हमारे समुदाय और हमारी पहचान का हिस्सा थे। उनकी अनुपस्थिति हमेशा खलेगी।”
आरसीबी ने आगे कहा कि उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई किसी भी तरह नहीं की जा सकती। लेकिन परिवारों के लिए आर्थिक सहयोग और निरंतर देखभाल के वादे के साथ 25-25 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
‘आरसीबी केयर्स’ की शुरुआत
टीम मैनेजमेंट ने बताया कि यह पहल सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों के प्रति करुणा और एकजुटता का प्रतीक है। इसी के साथ ‘आरसीबी केयर्स’ नामक एक नई दीर्घकालिक सामाजिक जिम्मेदारी अभियान की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य meaningful कार्यों के जरिए हादसे में जान गंवाने वालों की स्मृति को सम्मान देना और आगे भी प्रशंसकों की भावनाओं को प्राथमिकता देना है।
आरसीबी ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही ‘आरसीबी केयर्स’ से जुड़ी और जानकारियां साझा की जाएंगी।
हादसे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आरसीबी ने आईपीएल 2025 का खिताब पंजाब किंग्स को हराकर जीता था। यह टीम का 18 साल में पहला खिताब था, जिसकी खुशी में हजारों फैंस 4 जून को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम और उसके बाहर जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। अचानक भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। इस अफरा-तफरी में 11 लोगों की मौत हो गई जबकि 33 अन्य घायल हो गए थे।
आरसीबी और फैंस का रिश्ता
आरसीबी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि फैंस ही उनकी असली ताकत हैं और उनकी सुरक्षा व सम्मान सर्वोपरि है। टीम की यह पहल न सिर्फ हादसे में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए है, बल्कि भविष्य में फैंस के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार माहौल तैयार करने का वादा भी है।
इस घटना ने जहां जश्न को गम में बदल दिया, वहीं आरसीबी का यह कदम पीड़ित परिवारों को सहारा देने की दिशा में एक संवेदनशील और मानवीय प्रयास माना जा रहा है।














