
जयपुर के सवाई मानसिंह इंडोर स्टेडियम में खेले गए प्रो कबड्डी लीग सीजन 12 के मुकाबलों ने दर्शकों को एक बार फिर से रोमांचित कर दिया। पहले मुकाबले में हरियाणा स्टीलर्स ने कड़ी टक्कर देते हुए पुनेरी पल्टन को 34-30 से हराया, जबकि दूसरे मैच में तेलुगू टाइटंस ने लगातार तीन हार के बाद दमदार वापसी करते हुए तमिल थलाइवाज को 43-29 के बड़े अंतर से शिकस्त दी। इन दोनों मुकाबलों में रेड और डिफेंस दोनों मोर्चों पर खिलाड़ियों ने दर्शनीय प्रदर्शन किया।
हरियाणा स्टीलर्स और पुनेरी पल्टन के बीच हुआ मुकाबला शुरुआत से ही जबरदस्त टक्कर वाला रहा। हरियाणा ने शुरूआती लीड लेने के बाद कुछ समय के लिए रफ्तार खोई, लेकिन जल्द ही अपनी पकड़ मजबूत करते हुए पल्टन को दबाव में ला दिया। शिवम और विनय की आक्रामक रेडिंग और कप्तान जयदीप के सटीक टैकल ने टीम को निर्णायक बढ़त दिलाई। पल्टन के लिए पंकज मोहिते ने संघर्ष करते हुए एक समय स्कोर को नजदीक जरूर ला दिया, लेकिन अंतिम क्षणों में शिवम की दो अंकों की रेड ने स्टीलर्स की जीत पक्की कर दी।
हरियाणा के लिए यह सात मैचों में पांचवीं जीत रही, जिससे टीम का मनोबल ऊंचा हुआ है। वहीं पल्टन को नौ मुकाबलों में तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा, हालांकि उन्होंने मैच के मध्य में वापसी की कोशिश की थी।
दूसरे मुकाबले में तेलुगू टाइटंस ने तमिल थलाइवाज को हराकर अपनी खोई हुई लय दोबारा हासिल की। पिछले तीन मैचों में हार झेल चुकी टाइटंस ने इस बार कोई मौका नहीं छोड़ा और रेडिंग से लेकर डिफेंस तक सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विजय मलिक और भरत ने रेडिंग में विपक्षी डिफेंस को बार-बार भेदते हुए अंक जुटाए, जबकि अंकित और डिफेंस यूनिट ने थलाइवाज के रेडरों को जकड़कर रखा।
थलाइवाज के लिए अर्जुन देसवाल का प्रदर्शन इस मुकाबले में फीका रहा, जबकि कंडोला और रौनक ने टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन टीम के अन्य सदस्य लय में नहीं दिखे। इस हार के साथ थलाइवाज को छह मैचों में तीसरी बार हार का सामना करना पड़ा है।
टाइटंस की यह नौ मुकाबलों में चौथी जीत रही, जिसने उन्हें लीग टेबल में टॉप-4 में पहुंचा दिया है। आने वाले मुकाबलों में इस लय को बरकरार रखना अब उनके लिए चुनौती होगी, वहीं थलाइवाज को अपनी रणनीतियों पर फिर से मंथन करने की आवश्यकता है। जयपुर की इस रोमांचकारी रात ने एक बार फिर से दिखा दिया कि कबड्डी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जज्बातों की लड़ाई है।














