
भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा एक ऐसे सामाजिक कार्य से सुर्खियों में हैं, जो इंसानियत और मातृत्व की मिसाल पेश करता है। हाल ही में मां बनीं ज्वाला गुट्टा हर दिन एक सरकारी अस्पताल को लगभग 600 मिलीलीटर ब्रेस्ट मिल्क दान कर रही हैं। अब तक वह करीब 30 लीटर दूध दान कर चुकी हैं, जिससे उन नवजात शिशुओं की जिंदगी को सहारा मिला है जिनकी माताएँ उन्हें दूध नहीं पिला पा रही हैं।
मां के दूध को बताया अमृत
22 अप्रैल 2021 को अभिनेता विष्णु विनोद से शादी के बाद ज्वाला गुट्टा चार साल बाद मां बनीं। अपनी बच्ची को स्तनपान कराने के बाद वे शेष दूध जरूरतमंद बच्चों के लिए दान कर देती हैं। यह भारत में किसी खिलाड़ी द्वारा उठाया गया पहला ऐसा कदम है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। चिकित्सकों का मानना है कि मां का दूध नवजात के लिए अमृत के समान है। इसमें वे सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बच्चे की सेहत और विकास के लिए जरूरी हैं। यही नहीं, इससे शिशुओं में एलर्जी, अस्थमा और मोटापे का खतरा भी कम हो जाता है।
बैडमिंटन से समाज सेवा तक का सफर
ज्वाला गुट्टा का नाम भारतीय बैडमिंटन इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने 2010 और 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का मान बढ़ाया। उनकी जोड़ीदार अश्विनी पोनप्पा के साथ खेली गई शानदार पारियों ने भारतीय बैडमिंटन को नई ऊँचाई दी। यह जोड़ी लंबे समय तक विश्व रैंकिंग में टॉप-10 में शामिल रही। इसके अलावा, ज्वाला ने श्रुति कुरियन के साथ मिलकर कई बार नेशनल चैंपियनशिप अपने नाम की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियाँ
सिर्फ कॉमनवेल्थ तक ही नहीं, ज्वाला ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भी भारत को गौरवान्वित किया। साल 2011 में BWF विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके अलावा, 2014 में थॉमस और उबेर कप में भी कांस्य पदक हासिल किया। उनकी यह यात्रा बताती है कि बैडमिंटन कोर्ट से लेकर सामाजिक योगदान तक, वे हर जगह अपनी छाप छोड़ने में सफल रही हैं।














