
भारत ने ओलंपिक खेलों की मेजबानी का सपना अब आधिकारिक स्तर पर साकार करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। मंगलवार, 1 जुलाई 2025 को स्विट्जरलैंड के लूजान शहर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के साथ हुई अहम बैठक में भारत के प्रतिनिधिमंडल ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए औपचारिक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में अहमदाबाद को मेजबान शहर के तौर पर प्रस्तावित किया गया है। यह पहली बार है जब भारत ने किसी ओलंपिक आयोजन के लिए इतनी औपचारिक और स्पष्ट दावेदारी पेश की है।
IOC ने लगाई थी मेजबान चयन प्रक्रिया पर रोक, फिर भी भारत ने पेश की दावेदारी
गौरतलब है कि हाल ही में IOC ने घोषणा की थी कि वह भविष्य के ओलंपिक खेलों की मेजबानी के चयन की प्रक्रिया फिलहाल रोक रहा है। इस निर्णय को भारत की तैयारियों के लिए एक झटका माना जा रहा था। लेकिन भारत ने रणनीतिक रूप से इस रुकावट के बावजूद पहल की और IOC के अधिकारियों के सामने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की।
यह बैठक उस घोषणा के कुछ ही दिनों बाद हुई, जिससे यह संकेत मिला कि भारत अपनी मंशा को लेकर गंभीर है और किसी भी संभावित प्रक्रिया के पुनः शुरू होते ही सबसे पहले कतार में खड़ा रहना चाहता है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए केंद्रीय मंत्रालय, IOA और गुजरात सरकार के अधिकारी
इस प्रतिनिधिमंडल में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी ऊषा, केंद्रीय खेल मंत्रालय और गुजरात सरकार के अधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने IOC को बताया कि भारत ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए न केवल तैयार है, बल्कि विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे और संस्कृति के साथ एक यादगार आयोजन करने में सक्षम भी है।
अहमदाबाद के नाम को प्रमुखता से रखा गया, जो पहले से ही अपने स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता है। यहां के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे बड़े खेल परिसर, अच्छी सड़कें, हवाई संपर्क और होटल इंडस्ट्री इसे एक आदर्श मेजबान शहर बनाते हैं।
पीटी ऊषा का बयान: यह आयोजन पीढ़ियों पर पड़ेगा असर
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और पूर्व ट्रैक स्टार पीटी ऊषा ने इस मुलाकात को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “भारत में ओलंपिक खेलों का आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक अवसर होगा, बल्कि यह देश की भावी पीढ़ियों पर स्थायी प्रभाव छोड़ेगा। यह आयोजन खेल संस्कृति को नई दिशा देगा।”
भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षा: लंबे समय से रही है तैयारी
भारत लंबे समय से ओलंपिक की मेजबानी की इच्छा जता रहा है। 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन के बाद से भारत ने वैश्विक खेल आयोजनों की दिशा में बड़ी प्रगति की है। हाल ही में जी20 और वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन सफलतापूर्वक करने के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ी है।
गुजरात सरकार और केंद्र सरकार मिलकर अहमदाबाद को वैश्विक खेल राजधानी के रूप में विकसित करने पर काम कर रही हैं। वहीं, खेल मंत्रालय की योजनाओं में देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी और अकादमियों की स्थापना भी शामिल है।
2036 की मेजबानी की दौड़ में भारत के सामने कौन?
हालांकि भारत ने अब आधिकारिक दावेदारी पेश कर दी है, लेकिन 2036 ओलंपिक की मेजबानी को लेकर जर्मनी, इंडोनेशिया, तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देश भी अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। IOC फिलहाल मेजबानी प्रक्रिया पर विराम लगाए हुए है, लेकिन जैसे ही प्रक्रिया फिर से शुरू होगी, मुकाबला बेहद रोचक और प्रतिस्पर्धी होगा।
भारत की पहल को मिली वैश्विक नजरों में अहमियत
2036 ओलंपिक के लिए भारत की यह आधिकारिक दावेदारी न केवल खेल क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह देश की वैश्विक छवि को भी सुदृढ़ करती है। यदि भारत को मेजबानी मिलती है, तो यह न केवल भारतीय खेलों को वैश्विक मंच देगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं के भविष्य को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। अब सबकी नजर IOC के आगामी फैसलों पर टिकी है।
डिस्क्लेमर: यह आलेख उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं और आधिकारिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी अपडेट या निर्णय के लिए IOC और भारतीय ओलंपिक संघ की आधिकारिक घोषणाओं का इंतज़ार करें।














