
भारतीय तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड में टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने के करीब हैं। मैनचेस्टर में 23 जुलाई से शुरू होने वाले चौथे टेस्ट में अगर बुमराह पाँच विकेट ले लेते हैं, तो वह इंग्लैंड में किसी भी एशियाई गेंदबाज़ द्वारा सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने के वसीम अकरम के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे।
अकरम ने इंग्लैंड में 14 टेस्ट में 53 विकेट लिए थे, जबकि बुमराह ने अब तक 11 टेस्ट में 49 विकेट चटकाए हैं। चौथे टेस्ट में उन्हें यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए सिर्फ़ 5 विकेट की दरकार है।
दूसरा रिकॉर्ड: SENA देशों में सबसे ज़्यादा 5 विकेट हॉल
बुमराह वसीम अकरम का एक और प्रतिष्ठित रिकॉर्ड तोड़ने की दहलीज पर हैं, जो SENA देशों—दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया—में किसी एशियाई गेंदबाज़ द्वारा सबसे अधिक बार पांच विकेट लेने से जुड़ा है। अब तक बुमराह ने इन चार देशों में कुल 33 टेस्ट मैचों में 157 विकेट चटकाए हैं, जिनमें 11 बार उन्होंने एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए हैं। यह आंकड़ा वसीम अकरम के 32 टेस्ट में 146 विकेट और 11 फाइव विकेट हॉल के बराबर है। इस सूची में मुथैया मुरलीधरन तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 23 मैचों में 125 विकेट लेते हुए 10 बार पारी में पांच विकेट झटके। ऐसे में यदि बुमराह मैनचेस्टर टेस्ट की किसी एक पारी में पांच विकेट लेने में सफल रहते हैं, तो वह इस श्रेणी में अकेले शीर्ष पर पहुंच जाएंगे और एक नया इतिहास रच देंगे।
टीम इंडिया को झेलनी पड़ी चोटों की मार
जहाँ यह टेस्ट भारत के लिए श्रृंखला बराबरी का अवसर है, वहीं तेज़ गेंदबाज़ी विभाग में चोटों ने चुनौतियाँ और बढ़ा दी हैं। आकाश दीप और अर्शदीप सिंह दोनों चोटिल होकर सीरीज़ से बाहर हो चुके हैं, जिससे बुमराह की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
हालाँकि पहले कयास लगाए जा रहे थे कि बुमराह को इस मैच में आराम दिया जाएगा, पर अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि वह एक बार फिर गेंदबाज़ी आक्रमण की अगुआई करते दिखेंगे।
बुमराह ने पहले और तीसरे टेस्ट दोनों में 5 विकेट हॉल लेकर भारत को मुकाबले में बनाए रखा। उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी से यह दिखाया कि दबाव में कैसे प्रदर्शन किया जाता है और क्यों उन्हें इस पीढ़ी के सबसे प्रभावशाली गेंदबाज़ों में गिना जाता है।
क्या कहता है क्रिकेट इतिहास?
अगर बुमराह ये दोनों रिकॉर्ड तोड़ते हैं, तो वह वसीम अकरम जैसे दिग्गज के स्तर को पार कर एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुँच जाएंगे। इंग्लैंड की परिस्थितियों में लगातार प्रभावी प्रदर्शन कर पाना एक तेज़ गेंदबाज़ के लिए सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है—और बुमराह इसे एक के बाद एक पार कर रहे हैं।
इस चौथे टेस्ट की अहमियत भारत की श्रृंखला में वापसी के लिए जितनी है, उतनी ही बुमराह की व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए भी है। मैनचेस्टर में अगर बुमराह इन दो रिकॉर्ड्स पर कब्ज़ा कर लेते हैं, तो यह सिर्फ़ एक जीत नहीं, बल्कि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन जाएगा।














