
4 जून 2025 को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे में 11 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें एक 14 वर्षीय बच्ची भी शामिल थी। अब इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए स्पष्ट रूप से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पुलिस के पास "अलादीन का चिराग" नहीं है, जो वह अचानक उमड़ी भीड़ से निपटने की व्यवस्था कर सके।
सोशल मीडिया पोस्ट बना भगदड़ की वजह
रिपोर्ट के अनुसार, RCB ने बिना पूर्व अनुमति के पुलिस को सूचित किए बिना सोशल मीडिया पर एक विजय जुलूस का पोस्ट डाल दिया। इसके चलते हजारों की संख्या में लोग अचानक स्टेडियम के बाहर जुट गए। ट्रिब्यूनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “महज 12 घंटे के भीतर पुलिस से भीड़ नियंत्रण की पूरी व्यवस्था करना असंभव था।” आदेश में कहा गया कि पुलिसकर्मी भी इंसान होते हैं, भगवान या जादूगर नहीं कि चमत्कार कर सकें।
IPS विकास कुमार को बहाल करने के आदेश
इस भगदड़ के बाद जिन अधिकारियों पर गाज गिरी थी, उनमें प्रमुख नाम IPS विकास कुमार विकास का था, जो उस समय वेस्ट ज़ोन के एडीशनल कमिश्नर और चिन्नास्वामी स्टेडियम के प्रभारी अधिकारी थे। उन्हें निलंबित कर दिया गया था। लेकिन अब ट्रिब्यूनल ने उनके निलंबन को रद्द करते हुए उन्हें राहत दी है। साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि उनकी निलंबन अवधि को उनकी सेवा का हिस्सा माना जाए।
अन्य अधिकारियों के निलंबन पर पुनर्विचार का सुझाव
ट्रिब्यूनल ने कर्नाटक सरकार से यह भी आग्रह किया है कि वह बेंगलुरु के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद और डीसीपी शेखर एच. टेक्कण्णावर के निलंबन पर दोबारा विचार करे। CAT का कहना है कि इस निलंबन के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं था जिससे यह साबित हो कि इन अधिकारियों की लापरवाही से हादसा हुआ।
राजनीतिक तकरार और विपक्ष का हमला
हादसे के बाद से ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, विपक्ष के निशाने पर हैं। भाजपा और जेडीएस ने इस घटना को “सरकार प्रायोजित भगदड़” करार देते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने 9 जून को पांच वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था — विकास कुमार, बी. दयानंद, शेखर एच. टेक्कण्णावर, एसीपी सी. बालकृष्ण और इंस्पेक्टर ए.के. गिरीश।
रिपोर्ट के निष्कर्ष और भविष्य की राह
ट्रिब्यूनल ने साफ तौर पर कहा है कि इस हादसे के लिए पुलिस को दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उनके पास पूर्व सूचना नहीं थी और परिस्थितियां असाधारण थीं। हालांकि, सरकार चाहे तो इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है।














