
भारत की घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज सरफराज़ खान एक बार फिर टीम इंडिया में चयन से चूक गए हैं, और अब इस मसले पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर धार्मिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि क्या सरफराज़ को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज किया गया क्योंकि उनके नाम के साथ 'खान' जुड़ा है?
शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा — “Is Sarfaraz Khan not selected because of his surname ! #justasking. We know where Gautam Gambhir stands on that matter.” इस बयान के जरिए उन्होंने गंभीर के भारतीय जनता पार्टी (BJP) से पुराने जुड़ाव पर भी निशाना साधा।
बता दें कि मंगलवार को भारत ए टीम का ऐलान हुआ था, जो अक्टूबर-नवंबर में दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ मुकाबले खेलेगी। इस टीम में सरफराज खान को शामिल नहीं किया गया, जिससे क्रिकेट फैंस के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है।
ओवैसी ने भी उठाए सवाल, मोहसिन रजा ने किया पलटवार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरफराज को नजरअंदाज करने पर सवाल उठाए। AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, "जब एक खिलाड़ी का औसत इतना अच्छा है, तो उसके ना चुने जाने के पीछे कुछ तो बात होगी।"
हालांकि, इस मसले पर पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और भाजपा नेता मोहसिन रज़ा ने कड़ा विरोध जताया और इसे "राजनीतिक एजेंडा" करार दिया। उन्होंने कहा, "क्रिकेट के भविष्य से खेलना बंद करें। मोहम्मद शमी खेलते हैं, मोहम्मद सिराज खेलते हैं। फिर ये भेदभाव का आरोप कैसे? ये अनुचित है।"
क्या है सरफराज के प्रदर्शन का सच?
सरफराज खान ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म दिखाई है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका औसत 65 से ऊपर है। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ नवंबर 2024 में अपना टेस्ट डेब्यू किया था और उसी सीरीज में 150 रनों की शतकीय पारी खेली थी। इसके बावजूद उन्हें न तो ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए मौका मिला, न ही इंग्लैंड दौरे में टीम में जगह दी गई।
हाल ही में इंग्लैंड लायंस के खिलाफ उन्होंने केंटरबरी में तेज गेंदबाजी वाली परिस्थितियों में 92 रन बनाकर आलोचकों को चुप कराया था। लेकिन उसके बाद भी करुण नायर को उनके ऊपर तरजीह दी गई, जिसे लेकर सवाल उठने लाजमी हैं। करुण को इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में मौका मिला, लेकिन प्रदर्शन नहीं कर सके और टीम से बाहर हो गए — इसके बावजूद सरफराज़ को दोबारा नहीं बुलाया गया।
चोट और चयन की उलझन
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने हाल ही में सफाई दी थी कि वेस्टइंडीज सीरीज के लिए सरफराज को उनकी जांघ की चोट (क्वाड्रिसेप इंजरी) के चलते टीम से बाहर रखा गया। उन्होंने इरानी कप और दलीप ट्रॉफी जैसे अहम टूर्नामेंट्स में भाग नहीं लिया था। लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद, बार-बार टीम से बाहर किए जाने पर अब सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी बनाम चयन की पारदर्शिता
टीम इंडिया में चयन को लेकर धार्मिक पक्षपात का आरोप कोई पहली बार नहीं लगा है, लेकिन इस बार यह सीधे तौर पर कोच और चयनकर्ताओं की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। क्रिकेट के गलियारों में भले ही यह एक तकनीकी और प्रदर्शन आधारित फैसला माना जा रहा हो, लेकिन जब किसी खिलाड़ी को लगातार नजरअंदाज किया जाए, तो शक की गुंजाइश रह जाती है।
सरफराज खान ने तमिलनाडु में बुछी बाबू टूर्नामेंट में शानदार शतक के साथ वापसी की है और अब रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में अपनी बल्लेबाजी से एक बार फिर खुद को साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या उन्हें उनकी काबिलियत का सही ईनाम मिलेगा — या फिर राजनीति और पूर्वाग्रह उनका रास्ता रोकते रहेंगे?














