
सीकर के फतेहपुर के नांगल से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो इस कोरोनाकाल में दिल को सताने वाली हैं। यहां एक व्यक्ति ने अस्पताल की दर पर ही दम तोड़ दिया, लेकिन अस्पताल के अंदर से कोई स्टाफ बाहर नहीं आया। पुलिसकर्मी ने मिन्नतें की तो डॉक्टर ने उसे भी फटकार लगा दी। अपने पति की नाक पर आक्सीजन लगाए महिला बेबसी और गुस्से से अस्पताल की अव्यवस्था पर चिल्ला रही थी, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। भामाशाह पैसों, मशीनों और अन्य तरह से अस्पताल प्रशासन की मदद कर रहा है। इसके बाद भी यहां की अव्यवस्था लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।
फतेहपुर के नांगल से संजय भास्कर को सांस लेने में तकलीफ होने पर पत्नी के साथ निजी अस्पताल अमर जैन पहुंचे। यहां पर आक्सीजन लगाने के बाद उनको सीकर के कोविड केयर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। यहां पर एंबूलेंस से नीचे उतारने के लिए महिला चिल्लाती रही। यहां तक की एंबूलेंस के चालक ने प्रयास भी किए, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं था।
मदद के लिए गए पुलिसकर्मी से डॉक्टर बोले- तुम अपनी ड्यूटी करो
महिला की चीख सुनकर पुलिसकर्मी जरूर अंदर गए और डॉक्टर को भी बताया, लेकिन डॉक्टर्स ने पुलिस वालों को ये कहते हुए डांट दिया कि मैं उसे अंदर लेकर आउंगा क्या। तुम्हारी ड्यूटी दरवाजे पर लोगों को अंदर आने से रोकने की है, अपनी ड्यूटी करो। इसके बाद पुलिसकर्मी बाहर आकर चुपचाप खड़े हो गए। कुछ देर बाद संजय की सांसें उखड़ गई।














