दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं, और भारतीय जनता पार्टी ने 27 साल बाद दिल्ली में सत्ता हासिल कर ली है। वहीं, आम आदमी पार्टी की 10 साल पुरानी सत्ता का अंत हो गया है। भाजपा ने दिल्ली की 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि आम आदमी पार्टी केवल 22 सीटों तक ही सिमट गई। कांग्रेस के लिए यह चुनाव और भी निराशाजनक साबित हुआ, क्योंकि उसे लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव में 0 सीटें मिलीं। बड़ी बात यह है कि दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर कांग्रेस की जमानत भी जब्त हो गई है। अब हम जानेंगे कि कौन सी 3 सीटें हैं, जहां कांग्रेस की जमानत बची रही।
कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा
इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों में से सिर्फ तीन सीटों पर अपनी जमानत बचाई, और लगातार तीसरी बार उसका खाता तक नहीं खुला। हालांकि, कांग्रेस ने अपने वोट शेयर में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है। इस बार कांग्रेस ने कुल 6.4 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल 4.26 प्रतिशत वोट मिले थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि कांग्रेस ने दिल्ली में तीन चुनावों (1998 में 52 सीटें, 2003 में 47 सीटें, और 2008 में 43 सीटें) में जीत हासिल की थी और 15 साल तक सत्ता में रही थी। हालांकि, उसके बाद से दिल्ली में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता चला गया।
इन सीटों पर बची जमानत
बादली सीट: दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव को इस सीट पर कुल 41,071 वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 27 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले।
कस्तूरबा नगर विधानसभा क्षेत्र: कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक दत्त दूसरे स्थान पर रहे। दत्त ने 27,019 वोट हासिल किए और उन्हें लगभग 32 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
नांगलोई जाट सीट: कांग्रेस के उम्मीदवार रोहित चौधरी ने इस सीट पर 32,028 वोट प्राप्त किए, जो करीब 20 प्रतिशत वोट शेयर था। वह तीसरे नंबर पर रहे।
जानकारी के लिए: चुनाव में यदि किसी उम्मीदवार को डाले गए कुल वोटों का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त नहीं होता है, तो उसकी जमानत राशि जो उसने चुनाव आयोग के समक्ष दी थी, जब्त कर ली जाती है।