
उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किए जाने को लेकर कांग्रेस ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा प्रहार किया है। मंगलवार को कांग्रेस ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति अब इस हद तक पहुंच गई है कि जो सरकार पहले देश के मुसलमानों से नागरिकता के कागजात मांगती थी, वही अब शंकराचार्य से भी प्रमाण पत्र तलब कर रही है।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मुख्यमंत्री या प्रशासन को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं।
माघ मेले के विवाद के बीच जारी हुआ नोटिस
यह पूरा मामला माघ मेले से जुड़ा है, जहां मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित रूप से रोके जाने का विवाद सामने आया था। इसी घटनाक्रम के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर यह सवाल किया कि वे स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य किस आधार पर बता रहे हैं।
इस नोटिस के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और कांग्रेस ने इसे धार्मिक परंपराओं में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है।
‘आधी रात को नोटिस भेजकर पहचान पूछ रही सरकार’ : कांग्रेस
पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “शंकराचार्य की नियुक्ति कोई प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह गुरु-शिष्य की सदियों पुरानी अखंड परंपरा के तहत होती है। लेकिन आज सरकार आधी रात को नोटिस भेजकर पूछ रही है कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं।”
उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सामने नतमस्तक होते हैं, तब तक उन्हें शंकराचार्य माना जाता है। जब तक वे गौ मांस के मुद्दे पर सवाल नहीं उठाते, तब तक वे शंकराचार्य रहते हैं। जब तक वे अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं करते, तब तक भी उनकी मान्यता बनी रहती है। लेकिन जैसे ही उन्होंने सत्ता के सामने सिर झुकाने से इनकार किया, सरकार उनसे पहचान के कागज मांगने लगी।
‘अब शंकराचार्य से भी कागज मांगने की नौबत’
खेड़ा ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “भाजपा नेताओं का रवैया अब जगजाहिर हो चुका है। पहले वे मुसलमानों से कहते थे—कागज दिखाओ। आज स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि शंकराचार्य से भी दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं।”
उन्होंने इस कार्रवाई को संविधान और न्यायिक आदेशों के खिलाफ बताया। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि 1954 में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि किसी भी मठ या धार्मिक संस्थान के संचालन में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसी को नहीं है। ऐसे में अजय सिंह बिष्ट, यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भेजा गया यह नोटिस कानून का खुला उल्लंघन है।
पवन खेड़ा ने अंत में कहा कि पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी को देख रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देश इस रवैये को कभी नहीं भूलेगा और न ही माफ करेगा।














