
उन्नाव मामले में आरोपी और भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़े प्रकरण में अब उनकी बेटियां सार्वजनिक रूप से सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद डॉक्टर इशिता सेंगर और ऐश्वर्या सेंगर ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। जहां इशिता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुली चिट्ठी साझा की, वहीं ऐश्वर्या ने मीडिया के जरिए अपनी बात रखी और परिवार की पीड़ा को सामने रखा।
कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने कहा कि अब तक मामले की वास्तविकता और तथ्यों पर गंभीर चर्चा शुरू ही नहीं हो पाई है। उन्होंने दावा किया कि पीड़िता ने अपने बयान कई बार बदले—कभी घटना का समय दोपहर 2 बजे बताया, फिर शाम 6 बजे और अंत में रात 8 बजे। ऐश्वर्या का कहना है कि एम्स मेडिकल बोर्ड की एक रिपोर्ट भी मौजूद है, जिसमें पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक बताई गई थी, लेकिन इन तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया गया।
ऐश्वर्या ने भावुक होते हुए कहा कि वह पिछले आठ वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनके और उनके परिवार के दर्द की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे न सिर्फ सम्मान और मानसिक शांति छीनी गई, बल्कि अपनी बात कहने और सुने जाने का मौलिक अधिकार भी धीरे-धीरे खत्म होता चला गया। इसके बावजूद उन्होंने न्याय की उम्मीद छोड़ी नहीं है और मीडिया से अपील की कि बिना पुष्टि के कोई भ्रामक जानकारी न फैलाए।
डॉ. इशिता सेंगर की खुली चिट्ठी
ऐश्वर्या के बयान के साथ-साथ कुलदीप सिंह सेंगर की दूसरी बेटी, डॉक्टर इशिता सेंगर ने भी सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने लिखा कि उन्हें केवल एक पहचान तक सीमित कर दिया गया—“एक भाजपा विधायक की बेटी”—और इसी वजह से उनकी व्यक्तिगत पीड़ा, इंसानियत और न्याय की मांग को अनदेखा किया गया। बिना दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल किए, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उन्हें लगातार निशाने पर लिया गया।
इशिता ने यह भी लिखा कि उनके परिवार ने कभी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन नहीं किया और न ही मीडिया ट्रायल का सहारा लिया। उन्होंने हमेशा कानून और संस्थाओं पर भरोसा रखते हुए चुप्पी साधे रखी। हालांकि, इस चुप्पी की भारी कीमत उन्हें वर्षों तक अपमान, आर्थिक नुकसान और गहरे मानसिक तनाव के रूप में चुकानी पड़ी।
अपने पत्र में उन्होंने साफ कहा कि वह किसी विशेष सुविधा या रियायत की मांग नहीं कर रहीं, बल्कि केवल निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय चाहती हैं। इशिता ने लिखा कि वह आज भी देश की न्याय प्रणाली में विश्वास बनाए रखना चाहती हैं, लेकिन यह भरोसा अब धीरे-धीरे टूटने के कगार पर पहुंच रहा है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप केस में नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है और दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।














