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चीनी महंगी होने के लिए एथेनॉल जिम्मेदार नहीं, सरकार ने बताई कीमत बढ़ने की कई वजहें

चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार ने कहा कि एथेनॉल इसका कारण नहीं है। सरकार ने कम उत्पादन, बढ़ी मांग और वैश्विक कमी समेत कई वजहें बताईं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 22 Aug 2026 8:11:31

चीनी महंगी होने के लिए एथेनॉल जिम्मेदार नहीं, सरकार ने बताई कीमत बढ़ने की कई वजहें

चीनी की कीमतों में हालिया तेजी को लेकर केंद्र सरकार ने एथेनॉल नीति को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, चीनी के दाम बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में अनुमान से कमी, त्योहारी मांग में बढ़ोतरी, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान और वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी जैसे कई कारण हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा सख्त की गई है और शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।

मंत्रालय का अनुमान है कि त्योहारी अवधि में बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे कीमतों पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है।

एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल हुआ कम

सरकार ने अपने पक्ष में एथेनॉल उत्पादन से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के उपयोग का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गया है।

इसके अलावा देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा समय में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि को एथेनॉल के लिए गन्ने या चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना उचित नहीं है।

कम उत्पादन और बढ़ी मांग भी बनी वजह

केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन के अनुमान से कम रहने को प्रमुख कारणों में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा चीनी सीजन में उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है, जबकि शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख मीट्रिक टन का था।

सरकार के मुताबिक उत्पादन में कमी के बावजूद देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। यह स्टॉक अक्टूबर में नए पेराई सत्र की शुरुआत तक घरेलू मांग को पूरा करने में मदद करेगा।

इसके साथ ही त्योहारी सीजन में खपत बढ़ने और मौसम की वजह से गन्ने की फसल प्रभावित होने को भी कीमतों में तेजी का कारण बताया गया है। मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर चीनी की कम आपूर्ति का भी उल्लेख किया है। उसके अनुसार, दुनिया में करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान है।

सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी का भी किया जिक्र

मंत्रालय ने कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी केवल उत्पादन और मांग से जुड़ी नहीं है। उद्योग के कुछ वर्गों में सट्टेबाजी और जमाखोरी को भी कीमतों पर असर डालने वाले कारकों में शामिल किया गया है।

सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें चीनी के भंडारण की सीमा को सख्त करना और शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देना शामिल है।

एथेनॉल कार्यक्रम से मिलों को मिला सहारा: सरकार

केंद्र ने एथेनॉल कार्यक्रम के दूसरे पहलुओं पर भी जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम से किसानों को लाभ मिला है और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद हुई है।

भारत में सामान्य तौर पर सालाना 320 से 340 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280 से 290 लाख मीट्रिक टन रहती है। ऐसे वर्षों में जब उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है, तब अतिरिक्त चीनी का बड़ा स्टॉक मिलों की पूंजी को लंबे समय तक रोक सकता है। इससे गन्ना किसानों को भुगतान में देरी की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

सरकार के अनुसार, अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने से इस समस्या को कम करने में मदद मिली है। इससे चीनी मिलों को अतिरिक्त स्टॉक के बोझ से राहत मिलने के साथ उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।

कांग्रेस ने E-20 नीति पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, कांग्रेस ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाली E-20 नीति की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को बिना एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की नीति पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल का असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि इस नीति के कारण आम लोगों पर महंगे भोजन और महंगे सफर, दोनों का बोझ पड़ रहा है।

इस तरह चीनी की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच एथेनॉल नीति को लेकर मतभेद सामने आया है। जहां सरकार मौजूदा तेजी के लिए कम उत्पादन, बढ़ी मांग, मौसम और वैश्विक आपूर्ति जैसे कारणों को प्रमुख मान रही है, वहीं कांग्रेस E-20 नीति के प्रभाव को लेकर सवाल उठा रही है।

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