शहजाद पूनावाला के भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के प्रवक्ता समेत पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को वजह बताया है। हालांकि, उनका इस्तीफा अभी पार्टी की ओर से स्वीकार नहीं किया गया है। इसी बीच कांग्रेस में जाने को लेकर दिए उनके बयान ने भी राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है।
पूनावाला ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को नियमित भुगतान नहीं करते। उन्होंने अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें घर का किराया देना पड़ता है और मकान मालिक केवल इसलिए किराया माफ नहीं कर देगा कि वह बीजेपी से जुड़े हुए हैं।
2024 से इस्तीफे पर कर रहे थे विचार
शहजाद पूनावाला के मुताबिक, बीजेपी छोड़ने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2024 से ही इस बारे में विचार कर रहे थे। उनका कहना है कि पार्टी छोड़ने के बारे में सोचने के दौरान कई नेताओं ने उनसे संपर्क भी किया था।
उन्होंने राजनीतिक संगठन से जुड़ने को नौकरी की तरह नहीं बताया। पूनावाला के अनुसार, कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल के साथ विचारधारा, किसी नेता के प्रति समर्थन या संगठन के प्रति लगाव के कारण जुड़ता है। उन्होंने कहा कि ये तीनों बातें उनके मामले में मौजूद थीं।
आर्थिक मुश्किलों को बताया अहम वजह
पूनावाला ने आर्थिक परिस्थितियों को अपने फैसले से जोड़ते हुए कहा कि राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को वेतन नहीं देते, जबकि उनके सामने निजी खर्च और जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। उन्होंने अपने मकान के किराये का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें हर महीने अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करना होता है।
अपने इस्तीफे से जुड़े पत्र में भी उन्होंने अत्यावश्यक आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब वह निजी क्षेत्र में जाने का फैसला कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा कामों के समर्थन की बात भी कही।
कांग्रेस में जाने के सवाल पर क्या बोले?
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो पूनावाला ने एक अलग अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने कई शर्तें रखीं। उनके मुताबिक, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा को पार्टी से हटाना होगा और नेहरू के कामों के लिए माफी मांगनी होगी।
उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि फिलहाल उनका कांग्रेस में जाने का कोई सीधा इरादा नहीं है। खास बात यह है कि पूनावाला वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।
बीजेपी से दूरी के बावजूद मोदी के समर्थन की बात
बीजेपी से इस्तीफा देने के बावजूद शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में बीजेपी भारत की सबसे अच्छी पार्टी है और वह वैचारिक रूप से प्रधानमंत्री मोदी के साथ बने रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करने के बाद उनके किसी दूसरी पार्टी में जाने की संभावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अपने इस्तीफे के पत्र में भी उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में जाने के बावजूद जहां भी संभव होगा, वह प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण एवं कार्यों का समर्थन करते रहेंगे।
इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ
शहजाद पूनावाला ने बीजेपी के प्रवक्ता सहित अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पार्टी ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि आगे वह निजी क्षेत्र में अपना करियर बनाने की दिशा में बढ़ सकते हैं, जबकि राजनीतिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के प्रति अपना समर्थन बनाए रखने की बात उन्होंने कही है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उनके कांग्रेस में शामिल होने वाली टिप्पणी की हो रही है, क्योंकि उन्होंने पार्टी में जाने की संभावना को सीधे खारिज करने के बजाय कई शर्तों से जोड़ दिया है।













