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देश में 'हिंदू-मुस्लिम' विवाद की जड़ क्या है? नितिन गडकरी ने खोली पोल, जानें क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश में ‘हिंदू-मुस्लिम’ विवाद की वजह बताई, कांग्रेस की वोट बैंक राजनीति और धर्मनिरपेक्षता की गलत व्याख्या को जिम्मेदार ठहराया। जानें गडकरी के विचार और भारतीय संस्कृति पर उनका दृष्टिकोण।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 24 Dec 2025 4:19:09

देश में 'हिंदू-मुस्लिम' विवाद की जड़ क्या है? नितिन गडकरी ने खोली पोल, जानें क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश में बार-बार उठने वाले ‘हिंदू-मुस्लिम’ विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की सोच और वर्षों तक चली वोट बैंक की राजनीति ने समाज में इस तरह की समस्याओं को जन्म दिया, जिनका असर आज भी दिखाई देता है। गडकरी के मुताबिक, ‘सेक्युलर’ शब्द का सही अर्थ कांग्रेस ने अपनी सुविधा के अनुसार बदल दिया, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शब्द ‘सेक्युलर’ का सही हिंदी भावार्थ ‘सर्व धर्म समभाव’ या ‘सभी के साथ समान न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं’ होता है। लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘धर्मनिरपेक्ष’ के रूप में परिभाषित कर अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप इस्तेमाल किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि समाज में विभाजन की रेखाएं और गहरी होती चली गईं।

आजादी के बाद बोए गए बीजों का असर आज तक

पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि वर्ष 1947 के बाद कांग्रेस को लंबे समय तक देश पर शासन करने का अवसर मिला। इस दौरान उसकी नीतियों और विचारधारा के तहत कुछ ऐसे बीज बोए गए, जिनका परिणाम आज ‘हिंदू-मुस्लिम’ समस्याओं के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद जिस तरह से धर्म और राजनीति को जोड़ा गया, उसी से कई तरह के सामाजिक विवाद पैदा हुए।

गडकरी का मानना है कि कांग्रेस के तथाकथित ‘सेक्युलरवाद’ और उसकी व्याख्या ने ही इन समस्याओं को जन्म दिया है, जिनसे देश आज भी जूझ रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सेक्युलर शब्द का अर्थ कभी भी धर्म से दूरी बनाना नहीं रहा, बल्कि सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखना इसका मूल भाव है।

सेक्युलरिज्म का असली मतलब क्या है?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि शब्दकोश में ‘सेक्युलर’ शब्द का अर्थ देखा जाए तो वह ‘धर्मनिरपेक्ष’ नहीं बल्कि ‘सर्व धर्म समभाव’ की ओर इशारा करता है। इसका मतलब है—हर व्यक्ति के साथ समान न्याय और किसी भी वर्ग या समुदाय का तुष्टिकरण नहीं। गडकरी ने जोर देकर कहा कि यही इसकी सच्ची और मूल भावना है, जिसे राजनीति में गलत तरीके से पेश किया गया।

इतिहास से सबक लेना क्यों जरूरी है

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि दुर्भाग्यवश 1947 के बाद राजनीति में धर्मनिरपेक्षता की जो परिभाषा गढ़ी गई, उसने कई समस्याओं को जन्म दिया, जो आज भी देश के लिए चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वोट बैंक आधारित नीतियों ने सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया।

गडकरी यहां उदय माहुरकर की पुस्तक ‘माई आइडिया ऑफ नेशन फर्स्ट: रीडिफाइनिंग अनएलॉयड नेशनलिज्म’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है ताकि अतीत में हुई गलतियों से सीख लेकर भविष्य में उन्हें दोहराने से बचा जा सके।

वाजपेयी के विचारों को किया दोहराया

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को दोहराते हुए नितिन गडकरी ने कहा, “भारत एक सेक्युलर देश है, यह पहले भी सेक्युलर था और आगे भी सेक्युलर ही रहेगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सेक्युलर पहचान किसी राजनीतिक दल या संगठन की देन नहीं है।

गडकरी ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति, हिंदू संस्कृति और सनातन परंपरा का स्वाभाविक गुण है, जहां ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ यानी पूरे विश्व के कल्याण की कामना की जाती है। उन्होंने परोक्ष रूप से नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारी संस्कृति कभी ‘मेरा कल्याण’ या ‘मेरे परिवार का कल्याण’ तक सीमित नहीं रही।

हिंदू संस्कृति पर गडकरी का दावा

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि किसी हिंदू शासक ने दूसरे धर्मों के पूजा स्थलों को नष्ट किया हो। उनके अनुसार, ऐसा इसलिए है क्योंकि यह न तो भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और न ही हमारी सोच या ‘आनुवंशिकी’ में है।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज कभी ‘अधिकारवादी’ या ‘विस्तारवादी’ नहीं रहा। हमारी परंपरा हमेशा सह-अस्तित्व, सहिष्णुता और सभी के कल्याण पर आधारित रही है, और यही भारत की असली पहचान है।

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