
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि देश में समान आर्थिक और राजनीतिक अधिकार सुनिश्चित करना संविधान की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल चुनावों में ‘पैसे बांटने’ से किसी प्रकार का कल्याण संभव नहीं है।
यह बयान भारत के पूर्व चुनाव आयोग और पूर्व कानून सचिव जी वी जी कृष्णमूर्ति की 91वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। इस मौके पर जोशी ने सुझाव रखा कि भेदभाव कम करने के लिए बड़े राज्यों को विभाजित कर छोटे राज्य बनाए जाएं। उनका तर्क था कि हर राज्य में चुनाव क्षेत्र और आबादी लगभग बराबर होने चाहिए।
वोटिंग अधिकार और आर्थिक असमानता
जोशी ने कहा कि हर नागरिक को वोट का समान अधिकार है, लेकिन देश के कुछ बड़े राज्यों जैसे कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र में लोगों की आर्थिक स्थिति में काफी अंतर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “कर्नाटक में रहने वाले व्यक्ति की आर्थिक ताकत अलग है। वहीं रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों या उत्तर-पूर्व के व्यक्ति की आर्थिक स्थिति अलग है। क्या उनकी वोटिंग शक्ति समान प्रभाव डालती है?”
उनका कहना था कि संविधान न केवल राजनीतिक अधिकार देता है, बल्कि आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित करता है। वोटिंग अधिकार तभी वास्तविक अर्थ में काम करता है जब हर नागरिक को आर्थिक न्याय भी मिले। डॉ. अंबेडकर ने भी इस विषय पर विस्तार से विचार किया था।
राजनीतिक और आर्थिक अधिकार में संतुलन जरूरी
जोशी ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों का संतुलन आवश्यक है। अगर विकास और संसाधनों का वितरण असमान रहा, तो लोकतंत्र के सभी मूल उद्देश्यों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र की सच्ची सेवा तभी संभव है जब अधिकार और अवसर समान हों।
चुनावों में पैसे बांटना समाधान नहीं
बीजेपी नेता ने बिहार चुनाव के संदर्भ में कहा कि चुनावों से पहले पैसे बांटना विकास या कल्याण का प्रमाण नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावों में धन वितरण असमान आर्थिक स्थिति का ही परिणाम है, और इससे लोगों के वास्तविक अधिकारों और कल्याण पर असर पड़ता है।
छोटे राज्य समाधान
जोशी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे राज्यों का निर्माण ही समस्या का स्थायी समाधान है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि देश में लगभग 70 छोटे राज्य हों, जिनकी आबादी और आर्थिक ताकत बराबर हो, तो पार्लियामेंट सभी के हित में काम कर सके।
जनगणना और डिलिमिटेशन जरूरी
जोशी ने याद दिलाया कि संविधान के अनुसार हर 10 साल में जनगणना होनी चाहिए और उसके आधार पर चुनाव क्षेत्रों का डिलिमिटेशन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे 25 साल तक स्थगित किया, तब यह अधिकार बाधित हुआ।
राज्यों में बढ़ती असमानता
जोशी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ राज्यों की आबादी और आर्थिक शक्ति में अंतर बढ़ गया है। उदाहरण के तौर पर, कुछ कम आबादी वाले राज्य आर्थिक रूप से मजबूत हुए, जबकि अधिक आबादी वाले राज्य कमजोर हुए। उन्होंने कहा कि पार्लियामेंट में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक ताकत अधिक है, लेकिन आर्थिक शक्ति कम है, जबकि तमिलनाडु और केरल आर्थिक रूप से काफी मजबूत हैं।














