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छात्र आंदोलन पर बदला RSS का सुर? मोहन भागवत बोले- Gen Z सबसे ईमानदार और देशभक्त पीढ़ी, संवाद की कमी से हुआ आंदोलन

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने छात्र आंदोलन पर बड़ा बयान देते हुए जेन-जी और जेन-अल्फा को ईमानदार व देशभक्त पीढ़ी बताया। उन्होंने कहा कि संवाद की कमी के कारण आंदोलन हुआ और युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 06 Aug 2026 10:35:02

छात्र आंदोलन पर बदला RSS का सुर? मोहन भागवत बोले- Gen Z सबसे ईमानदार और देशभक्त पीढ़ी, संवाद की कमी से हुआ आंदोलन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के बाद देशभर में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर खुलकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भीतर छात्र आंदोलन को लेकर सामने आए अलग-अलग बयानों ने भी चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। कुछ दिन पहले संघ के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने इस आंदोलन को "एंटी-कॉन्स्टिट्यूशनल" और "एंटी-नेशनल" बताते हुए इसकी आलोचना की थी, जबकि अब सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी का समर्थन करते हुए कहा है कि जेन-जी और जेन-अल्फा देश की सबसे ईमानदार और राष्ट्रभक्त पीढ़ियों में शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और संवाद की कमी ही छात्र आंदोलन की बड़ी वजह बनी।

तीन दिन पहले अतुल लिमये ने जताई थी कड़ी आपत्ति

कुछ दिन पहले RSS के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने दिल्ली में हुए CJP के आंदोलन को एक महत्वपूर्ण "केस स्टडी" बताते हुए कहा था कि इसकी दिशा संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं रही। उन्होंने इसे "एंटी-कॉन्स्टिट्यूशनल" और "एंटी-नेशनल" करार देते हुए कहा था कि शुरुआत में नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश स्वाभाविक था, लेकिन बाद में यह आंदोलन एक बड़े राजनीतिक एजेंडे की ओर मुड़ गया।

लिमये का कहना था कि इस आंदोलन के माध्यम से वामपंथी विचारधारा की "अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स" को परखने की कोशिश की गई। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध "ग्रामर ऑफ एनार्की" भाषण का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी थी कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को अराजकता की दिशा में नहीं जाने देना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से शुरू हुआ आंदोलन बाद में ऐसे लोगों के प्रभाव में चला गया, जिनका उद्देश्य अलग था।

मोहन भागवत ने युवाओं की सोच पर जताया भरोसा

अब RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान इस पूरे मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण पेश करता है। उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा को लेकर समाज में जो धारणाएं बनाई जाती हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। उनके अनुसार, आज की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में अधिक ईमानदार, जिम्मेदार और देशभक्ति की भावना से प्रेरित है।

भागवत ने कहा कि युवाओं की समस्याओं और शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समय रहते संवाद स्थापित किया जाता, तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन जैसी स्थिति शायद पैदा ही नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की बात सुनना और उनके सवालों का जवाब देना सरकार और समाज, दोनों की जिम्मेदारी है।

लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल


अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति में भगवान का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में यदि किसी प्रदर्शन के दौरान उन पर लाठीचार्ज या पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ऐसी परिस्थितियां आखिर बनी क्यों।

उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का निष्पक्ष मूल्यांकन तभी संभव है, जब उसके पीछे के कारणों को गंभीरता से समझा जाए। केवल परिणाम देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर दिया जोर


RSS प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में छात्रों द्वारा उठाए गए कई मुद्दे वास्तविक हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने माना कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी भी कई ऐसी कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। सरकार, शिक्षण संस्थानों और समाज को युवाओं के साथ नियमित संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि उनकी चिंताओं का समय पर समाधान निकाला जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पीढ़ी बिना अधिक सवाल किए बड़ों की बात स्वीकार कर लेती थी, लेकिन आज की जेन-जी और जेन-अल्फा हर निर्णय के पीछे तर्क और कारण जानना चाहती है। उनके अनुसार, यह बदलाव लोकतंत्र के लिए सकारात्मक है क्योंकि स्वस्थ बहस और विचार-विमर्श से ही बेहतर समाधान निकलते हैं। भारतीय परंपरा में शास्त्रार्थ की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों को सुनना समाज को मजबूत बनाता है।

'आंदोलन राष्ट्रविरोध नहीं, व्यवस्था सुधार का माध्यम होना चाहिए'

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि वे इस विचार से सहमत नहीं हैं कि युवाओं को आंदोलन नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन अपनी बात रखने का वैध और स्वीकार्य माध्यम है, बशर्ते वह संवैधानिक दायरे और मर्यादा के भीतर हो।

उन्होंने कहा कि युवाओं का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और अपनी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। प्रदर्शन करने वाले छात्रों को राष्ट्रविरोधी कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा हमारे अपने बच्चे हैं, जो देश का भविष्य हैं। उनके अनुभव के अनुसार, नई पीढ़ी समाज सेवा, ईमानदारी और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इसलिए उनकी आवाज को संदेह की नजर से देखने के बजाय गंभीरता से सुनना और रचनात्मक संवाद के जरिए समाधान तलाशना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

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