नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी की है। यह बयान इलाहाबाद हाईकोर्ट की उस सुनवाई के बाद आया, जिसमें अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में रखने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा की DM मेधा रूपम के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए थे। महुआ मोइत्रा ने अपनी पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया और मेधा रूपम को उनकी बेटी बताया।
महुआ मोइत्रा ने पोस्ट में लिखा, “जैसा शर्मनाक पिता, वैसी ही शर्मनाक बेटी।” उन्होंने इसे लोकतंत्र और कानून के लिए कलंक बताते हुए कहा कि भारत को ऐसे “अभिशाप” से मुक्त करने की जरूरत है।
आकृति चौधरी की हिरासत पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
यह विवाद 24 वर्षीय आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत से जुड़ा है। अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में राज्य सरकार ने 13 मई को आकृति चौधरी और पत्रकार सत्य वर्मा के खिलाफ NSA के प्रावधान लगाए।
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई। अदालत के मुताबिक, आकृति को NSA के तहत लगातार जेल में रखा गया, जबकि हिरासत के आधार को साबित करने के लिए ठोस सामग्री सामने नहीं रखी गई। पीठ ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
Like shameful father like shameful daughter- disgrace to democracy disgrace to due process of law. Noida DM Medha Roopam is illustrious daughter of illustrious CEC Gyanesh Kumar. We need to cleanse India of this scourge. https://t.co/oFl0nPbgrH
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) September 7, 2026
5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। अदालत ने आदेश दिया कि यह राशि मेधा रूपम और SHO स्तर तक के संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए।
अदालत ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाली कार्रवाई को सुधारते समय न्यायपालिका पीड़ित नागरिक को मुआवजा दिलाने के लिए कड़े निर्देश जारी कर सकती है। पीठ ने नौकरशाही की मनमानी को लेकर भी चेतावनी दी और कहा कि अधिकारियों का लगातार दमनकारी रवैया समाज में नागरिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।
गिरफ्तारी की तारीख को लेकर भी सवाल
अदालत के सामने गिरफ्तारी के समय को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार आकृति चौधरी को 11 अप्रैल को शाम करीब साढ़े पांच बजे नोएडा के बॉटिनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि गिरफ्तारी 12 अप्रैल को हुई थी।
सरकार ने चौधरी और उनके साथियों पर हिंसा भड़काने की साजिश का आरोप लगाया था। हालांकि, अदालत ने उन आरोपों के समर्थन में ठोस सामग्री पेश करने को कहा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ऐसी सामग्री पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि आकृति चौधरी ने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था।
अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी पर जोर
2 सितंबर के 15 पन्नों के आदेश में हाईकोर्ट ने अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को व्यापक अधिकार जरूर दिए जाते हैं, लेकिन उनकी निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए, नेताओं के प्रति नहीं। पीठ ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में अधिकारी जनता के सेवक हैं और जनता ही वास्तविक मालिक है।
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट में ठोस सबूत के अभाव वाले मामलों में जिला मजिस्ट्रेट से रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करने की अपेक्षा जताई, खासकर तब जब NSA जैसे कड़े कानून को लागू करने का फैसला लिया जा रहा हो।
इसी पूरे घटनाक्रम के बाद महुआ मोइत्रा ने मेधा रूपम पर निशाना साधा और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उनके पिता के रूप में CEC ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए दोनों पर तीखी टिप्पणी की।
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