
भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट और कठोर रुख अपनाया। बैठक में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की की मौजूदगी में जयशंकर ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत को “चुनिंदा और पक्षपातपूर्ण” तरीके से निशाना बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
विदेश मंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए सीमा पार आतंकवाद को संरक्षण देने वाले तत्वों पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार्य नहीं है और ऐसे देशों या शक्तियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन नहीं मिलना चाहिए, जो हमारे पड़ोस में हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा देते हैं। जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद के खिलाफ “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनाने का आग्रह किया।
भारत की चिंताओं को मजबूती से रखा
नई दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने पोलैंड के शीर्ष नेतृत्व के सामने भारत की प्रमुख सुरक्षा और कूटनीतिक चिंताओं को विस्तार से रखा। दोनों देशों ने भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर गहन विचार-विमर्श किया।
पोलिश प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में समान सोच वाले देशों के बीच संवाद और विचारों का आदान-प्रदान पहले से कहीं अधिक जरूरी हो जाता है।
रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर
जयशंकर ने याद दिलाया कि भारत और पोलैंड के संबंध अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के बाद रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष 2024-28 की कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे और व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सुरक्षा, स्वच्छ तकनीक और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहराई देने की संभावनाओं पर काम करेंगे।
हालांकि, बातचीत का रुख जल्द ही भू-राजनीतिक मुद्दों की ओर मुड़ गया, खासकर यूक्रेन युद्ध और उसके वैश्विक प्रभावों को लेकर। जयशंकर ने बताया कि वह पहले भी न्यूयॉर्क और पेरिस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मंत्री सिकोरस्की के साथ भारत का पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं और नई दिल्ली में भी उन्होंने वही बात दोहराई।
उन्होंने कहा कि भारत को बार-बार चुनिंदा ढंग से निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है। जयशंकर ने दोहराया कि भारत संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से चाहता है और किसी एक गुट के पक्ष में खड़े होकर चयनात्मक आलोचना का हिस्सा बनने से परहेज करता है।
पोलैंड की प्रतिक्रिया क्या रही?
पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने भी भारत की कई चिंताओं से सहमति जताई। उन्होंने स्वीकार किया कि चुनिंदा देशों या लक्ष्यों को निशाना बनाना गलत है और इससे वैश्विक व्यापार तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में गंभीर अव्यवस्था पैदा हो सकती है।
अपने देश के हालिया अनुभवों का जिक्र करते हुए सिकोरस्की ने बताया कि पोलैंड आगजनी और राज्य-प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों का शिकार रहा है, जिनमें रेलवे अवसंरचना पर हमला जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट और कठोर रुख अपनाना समय की मांग है, जिस पर दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति दिखाई दी।














