
भारत सरकार ने वेनेजुएला में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एक अहम ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। शनिवार रात जारी इस चेतावनी में भारतीयों से वेनेजुएला की यात्रा से परहेज करने और वहां मौजूद नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की गई है। यह कदम अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए राजनीतिक और सुरक्षा तनाव के मद्देनजर उठाया गया है।
विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा को टालना ही बेहतर है। मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपनी आवाजाही और सार्वजनिक गतिविधियों को सीमित रखें तथा हर समय स्थानीय हालात पर नजर बनाए रखें। इसके साथ ही काराकास स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने को भी बेहद जरूरी बताया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है और सुरक्षा स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में जो भारतीय नागरिक किसी भी कारण से फिलहाल वेनेजुएला में मौजूद हैं, उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। मंत्रालय ने सभी भारतीयों से आग्रह किया है कि वे अपनी स्थिति और संपर्क विवरण भारतीय दूतावास के साथ साझा करें। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला में करीब 50 गैर-निवासी भारतीय और लगभग 30 भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं।
बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक का सफर
वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चा में रहा है। 23 नवंबर 1962 को जन्मे मादुरो एक श्रमिक संघ के नेता के बेटे हैं। अपने शुरुआती जीवन में उन्होंने बस ड्राइवर के तौर पर काम किया और आम जनता के बीच रहते हुए संघर्षों को करीब से देखा। वर्ष 1992 में तत्कालीन सैन्य अधिकारी ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे शावेज के विश्वासपात्र बन गए।
1998 में ह्यूगो शावेज के नेतृत्व में उन्होंने चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। शावेज सरकार के दौरान मादुरो ने कई अहम पद संभाले, जिनमें नेशनल असेंबली के अध्यक्ष और विदेश मंत्री का पद शामिल है। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने वेनेजुएला के तेल कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की और कई देशों के साथ ऊर्जा संबंधों को विस्तार दिया।
आर्थिक संकट और विवादों से भरा शासनकाल
ह्यूगो शावेज के निधन से पहले उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुने जाने के बाद, 2013 में मादुरो राष्ट्रपति बने। हालांकि उनका कार्यकाल देश के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। मादुरो के शासन में वेनेजुएला गंभीर आर्थिक संकट की चपेट में आ गया और महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। खाद्य संकट, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दीं।
उनके शासन पर चुनावों में कथित धांधली, नागरिक अधिकारों के दमन और विपक्षी आंदोलनों को कठोर तरीके से कुचलने के आरोप लगते रहे हैं। 2014 और 2017 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हुई। इसके बावजूद जनवरी 2025 में हुए राष्ट्रीय चुनावों में मादुरो तीसरी बार राष्ट्रपति चुने गए। मौजूदा घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है, जिसका असर वहां रह रहे विदेशी नागरिकों पर भी पड़ सकता है।














