
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। मंगलवार, 18 नवंबर को मसूद ने दिल्ली में हुए आत्मघाती हमले के आरोपी आतंकी उमर उन नबी को “गुमराह नौजवान” करार दिया। उमर के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद ने कहा कि वह उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं और इस्लाम निर्दोष लोगों की हत्या को स्वीकार नहीं करता।
इमरान मसूद का बयान
मसूद ने स्पष्ट किया कि सामने आए वीडियो में आतंकी ने अपने कृत्य को जायज़ ठहराया है, लेकिन यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, “इस्लाम में किसी भी तरह से निर्दोष लोगों की हत्या करना हराम है। ये गुमराह लोग हैं और उनके कृत्य इस्लाम की सच्ची छवि को नहीं दर्शाते।” मसूद ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादियों के विचार किसी धर्म के प्रतिनिधि नहीं हैं।
बीजेपी ने कसा तंज
मसूद के इस बयान पर बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने उन्हें आतंकवाद के प्रचारक की तरह कार्य करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ‘आतंकवादी बचाओ गिरोह’ फिर सक्रिय हो गया है और कांग्रेस का हमेशा से आतंकवादियों के साथ रिश्ता रहा है।
पूनावाला ने एएनआई से बातचीत में कहा कि वीडियो में दिल्ली विस्फोट के मास्टरमाइंड ने आत्मघाती हमले को सही ठहराया। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद इसे गुमराह नौजवान बताकर बचाव कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं ने हमेशा आतंकवादियों का समर्थन किया है, चाहे वह महबूबा मुफ्ती, हुसैन दलवई, अबू आज़मी, इमरान मसूद या अनुमा आचार्य हों।
पूर्व मंत्री मोहसिन रज़ा का आरोप
उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता मोहसिन रज़ा ने भी कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने उन व्यक्तियों को भटकाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो बाद में चरमपंथी और आतंकवादी समूहों में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान देने वाले कांग्रेस नेता सीधे तौर पर चरमपंथियों का समर्थन कर रहे हैं।
कांग्रेस पर सवाल
रज़ा ने कहा, “चूंकि कांग्रेस भी गुमराह है, इसलिए वह पढ़े-लिखे युवाओं को भटकाने के लिए जिम्मेदार है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे इस तरह के बयान क्यों दे रहे हैं और आतंकवादियों का समर्थन क्यों कर रहे हैं।”
इस पूरे विवाद में सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस नेता सचमुच चरमपंथियों का समर्थन कर रहे हैं, या यह बयान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। दिल्ली ब्लास्ट और इससे जुड़े आतंकी नेटवर्क की जांच अभी जारी है, और इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेजी पकड़ती जा रही है।














