
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर रियल एस्टेट इंडस्ट्री में इस बार उम्मीदों का माहौल खासा गर्म है। बीते वर्षों में जहां आवासीय मांग ने मजबूती दिखाई है, वहीं बढ़ती ब्याज दरें, निर्माण सामग्री की लागत और महंगाई ने सेक्टर की रफ्तार पर असर भी डाला है। ऐसे दौर में उद्योग सरकार से ऐसे ठोस और दूरदर्शी फैसलों की अपेक्षा कर रहा है, जो न केवल घर खरीदारों के भरोसे को और मजबूत करें, बल्कि डेवलपर्स को भी दीर्घकालिक और स्थिर विकास की दिशा दें।
रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख मांगों में होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाना, अफोर्डेबल हाउसिंग को फिर से प्राथमिकता देना, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में इजाफा, टैक्स ढांचे को सरल बनाना, निर्माण लागत पर लगने वाले जीएसटी में राहत और आवास को आवश्यक बुनियादी ढांचे का दर्जा देना शामिल है।
होम लोन में राहत मिली, तो बाजार में लौटेंगे खरीदार
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होम लोन की ऊंची ईएमआई है। यदि बजट 2026 में ब्याज और प्रिंसिपल अमाउंट पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाती है, तो बड़ी संख्या में एंड यूजर्स एक बार फिर प्रॉपर्टी खरीदने की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी के मुताबिक, रियल एस्टेट सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ में से एक है और जीडीपी में इसका योगदान लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि बजट 2026 से सेक्टर को पुरानी लंबित मांगों पर ठोस निर्णय की उम्मीद है। सब्सिडी आधारित योजनाओं की बजाय अब उद्योग को स्पष्ट, स्थिर और पारदर्शी नीतियों की जरूरत है। पिछले दो वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की मांग में मजबूती देखने को मिली है, जहां खरीदार आवास को खर्च नहीं बल्कि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में कैपिटल गेन टैक्स और इंडेक्सेशन नियमों पर स्पष्टता बेहद जरूरी है, ताकि डेवलपर्स बड़े और बेहतर प्रोजेक्ट्स की योजना आत्मविश्वास के साथ बना सकें। बजट 2026 के पास मौका है कि वह भारत के लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट को एक भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में और मजबूत करे।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से बदलेगी प्रॉपर्टी की तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क और नए एयरपोर्ट्स ने रियल एस्टेट बाजार की दिशा और दशा दोनों बदल दी हैं। अब सेक्टर को उम्मीद है कि बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को और गति मिलेगी।
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि हाउसिंग सेक्टर ने हाल के वर्षों में अपनी मजबूती साबित की है, लेकिन आगे की ग्रोथ पूरी तरह नीतिगत समर्थन पर निर्भर करेगी। बजट से अपेक्षा है कि टैक्स डिडक्शन की सीमा मौजूदा प्रॉपर्टी कीमतों के अनुरूप तय की जाए, ताकि घर खरीदना आसान हो सके। ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक संकेत बाजार में विश्वास बनाए रखेंगे। इसके साथ ही सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे और नए रेजिडेंशियल हब विकसित हो सकेंगे।
टैक्स और ड्यूटी में कटौती से बढ़ेगा बाजार का भरोसा
स्टांप ड्यूटी और जीएसटी को लेकर भी लंबे समय से रियल एस्टेट सेक्टर राहत की मांग करता आ रहा है। डेवलपर्स का मानना है कि अगर ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटाई जाती है, तो बाजार में मांग और गतिविधियां दोनों तेज होंगी।
एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा के अनुसार, यूनियन बजट 2026 से सेक्टर को ऐसे कदमों की उम्मीद है, जो घर खरीदने की प्रक्रिया को ज्यादा किफायती और सरल बनाएं। स्टांप ड्यूटी को तर्कसंगत करना और टैक्स सिस्टम को आसान बनाना खरीदारों पर आर्थिक बोझ कम करेगा और फैसले लेने में तेजी लाएगा। होम लोन से जुड़े प्रोत्साहनों के जारी रहने से मांग को मजबूती मिलेगी और हाउसिंग सेक्टर में स्थिर विकास संभव होगा।
रेंटल और कमर्शियल सेगमेंट पर भी टिकी हैं नजरें
वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड मॉडल के चलते कमर्शियल और रेंटल हाउसिंग सेगमेंट में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में डेवलपर्स चाहते हैं कि बजट 2026 में इन दोनों क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट और अलग नीति लाई जाए।
ग्रुप 108 के मैनेजिंग डायरेक्टर संचित भूटानी का कहना है कि कमर्शियल रियल एस्टेट अब स्थिर और संतुलित विकास के चरण में पहुंच चुका है। ऑफिस और रिटेल स्पेस में अब केवल संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता आधारित मांग पर जोर है। रिटेल सेक्टर में अनुभव आधारित फॉर्मेट और बेहतर टेनेंट्स के कारण फुटफॉल मजबूत हुआ है। बजट 2026 से इस सेगमेंट को जीएसटी में राहत, नियमों के सरलीकरण और ऑफिस व रिटेल प्रॉपर्टी के आधुनिकीकरण के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद है, जिससे निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का मानना है कि शहरी इलाकों में रेंटल हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। अगर बजट में रेंटल और कमर्शियल स्पेस के लिए अलग से प्रोत्साहन मिलता है, तो यह शहरी विकास की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
किफायती आवास की सीमा बढ़ाने की मांग ने पकड़ा जोर
रियल एस्टेट इंडस्ट्री की एक बड़ी मांग अफोर्डेबल हाउसिंग की कीमत सीमा पर पुनर्विचार की है। डेवलपर्स का कहना है कि 45 लाख रुपये की मौजूदा सीमा अब अधिकांश शहरी बाजारों की वास्तविक कीमतों से मेल नहीं खाती। बढ़ती जमीन और निर्माण लागत को देखते हुए यह सीमा कई शहरों में व्यावहारिक नहीं रह गई है।
उद्योग जगत किफायती आवास की अधिकतम कीमत सीमा को बढ़ाकर 80 से 90 लाख रुपये करने की मांग कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकें। साथ ही निर्माण अनुबंधों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया गया है। डेवलपर्स का मानना है कि इन सुधारों से रुकी हुई परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और बाजार में घरों की सप्लाई बढ़ेगी।
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, इस समय रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे ज्यादा जरूरत स्थिर और स्पष्ट नीतियों की है। अगर बजट 2026 में टैक्स ढांचे को सरल किया जाता है, फंडिंग को आसान बनाया जाता है और अप्रूवल प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो इससे निवेशकों और डेवलपर्स दोनों का भरोसा मजबूत होगा और बाजार को लंबी अवधि की मजबूती मिलेगी।
कुशाग्र अंसल का यह भी कहना है कि अगर बजट में शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर पूंजीगत खर्च बढ़ाया जाता है, तो एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख बाजारों में रियल एस्टेट की मांग लंबे समय तक बनी रहेगी। बेहतर सड़कें, मेट्रो कनेक्टिविटी और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम नए इलाकों में विकास को बढ़ावा देंगे और खरीदारों के पास ज्यादा विकल्प होंगे।
संतुलित फैसलों से सेक्टर को मिलेगा नया संबल
कुल मिलाकर रियल एस्टेट सेक्टर बजट 2026 से ऐसे संतुलित और व्यावहारिक निर्णयों की उम्मीद कर रहा है, जो एक ओर घर खरीदारों को राहत दें और दूसरी ओर डेवलपर्स को स्थिरता और निवेश का भरोसा प्रदान करें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन अपेक्षाओं पर खरी उतरती है, तो आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर देश की आर्थिक प्रगति में और भी बड़ी भूमिका निभाने में सक्षम होगा।












