
कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी घमासान के केंद्र में आ गए हैं। एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके वक्तव्य ने कांग्रेस के भीतर असहजता पैदा कर दी है, जबकि सत्तारूढ़ दल भाजपा ने उनके विचारों को खुलकर समर्थन दिया है। थरूर ने इस चर्चा में राहुल गांधी की आलोचना करते हुए विदेश नीति को पार्टी राजनीति से ऊपर बताया था।
शशि थरूर ने कहा कि विदेश नीति किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश की सामूहिक सोच और हितों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों से बचा जाना चाहिए। थरूर के इस बयान को राहुल गांधी के विदेशों में किए गए भारत विरोधी प्रचार से जोड़कर देखा जा रहा है।
थरूर की टिप्पणी पर भाजपा और जदयू ने एक सुर में प्रतिक्रिया दी। दोनों दलों ने कहा कि वैश्विक मंचों पर देश की एकजुट आवाज बेहद जरूरी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निशाना बनाना सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि पूरे देश की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसा है।
हालांकि कांग्रेस ने थरूर के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब भाजपा देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की आलोचना करती है, तब शशि थरूर चुप क्यों रहते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि थरूर चयनात्मक तरीके से बयान दे रहे हैं।
गौरतलब है कि मीडिया कार्यक्रम में शशि थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत की विदेश नीति न तो भाजपा की है और न ही कांग्रेस की। यह नीति एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक व्यक्ति किसी प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय असफलता पर खुशी मनाता है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से भारत की हार का उत्सव मना रहा होता है।
थरूर ने अपने तर्क को मजबूती देने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक कथन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा था कि नेहरू का मानना था—यदि भारत समाप्त हो गया, तो फिर दुनिया में जीवित कौन बचेगा।
महाराष्ट्र भाजपा विधायक राम कदम ने शशि थरूर के बयान को सच्चाई से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल किसी पार्टी का नेता नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधि होता है। राम कदम ने राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि मखौल उड़ाने वाले बयान भारत की प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय भावना को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता की बात सुनने की सलाह दी।
वहीं जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब तक राजनीतिक दलों में सहमति बनी रही है। लेकिन दुर्भाग्य से अब देश के आंतरिक राजनीतिक मतभेदों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाया जा रहा है, जो सही परंपरा नहीं है।
नेहरू की आलोचना पर थरूर की चुप्पी क्यों?
कांग्रेस नेताओं ने थरूर पर हमला तेज करते हुए कहा कि भाजपा जब पंडित जवाहरलाल नेहरू को निशाना बनाती है, तब वह खुलकर जवाब क्यों नहीं देते। नेताओं ने शशि थरूर से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के “गुलाम” या समर्थक बनने से बचें और पार्टी की विचारधारा के साथ खड़े रहें।
कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद वी. हनुमंत राव ने भी इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि थरूर को केवल मौजूदा प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों के सम्मान में भी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए जेल तक की सजा भुगती, फिर भी आज उन्हें अपमानित किया जा रहा है।
‘थरूर चाटुकार की तरह व्यवहार कर रहे हैं’
कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी थरूर की आलोचना करते हुए कहा कि वह चाटुकारिता की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शशि थरूर की बौद्धिक क्षमता का वे सम्मान करते हैं, लेकिन मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर भी उन्हें खुलकर बोलना चाहिए। दास ने यह भी जोड़ा कि थरूर का बयान उनकी निजी राय हो सकता है, लेकिन पार्टी और देश की जमीनी हकीकत पर चुप्पी उचित नहीं है।














