
AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक कथित ‘शूटिंग वीडियो’ को लेकर तीखा हमला बोला है। रविवार को तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने इस वीडियो को बेहद आपत्तिजनक करार दिया और इसे खुले तौर पर नफरत फैलाने वाला बताया।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ की बात करते हैं, तो उसी पार्टी के मुख्यमंत्री देश के भीतर मुसलमानों को निशाना बनाते हुए ‘नो मर्सी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया देश की सामाजिक एकता के लिए खतरनाक है।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने स्पष्ट किया कि AIMIM इस मामले में कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, “एक मुख्यमंत्री ऐसा वीडियो पोस्ट करते हैं, जिसमें वे बंदूक से फायर करते नजर आते हैं और उनका टारगेट एक मुस्लिम बच्चे की तस्वीर बताई जा रही है। ऊपर से ‘क्लीन शॉट’ और ‘नो मर्सी’ जैसे जुमले बोले जाते हैं—यह बेहद गंभीर मामला है।”
ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा का हवाला देते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री मलेशिया में जाकर वहां के पीएम अनवर इब्राहिम से गले मिलते हैं, वहीं दूसरी ओर देश के अंदर उनकी ही पार्टी का मुख्यमंत्री नफरत की भाषा बोल रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह किस तरह की राजनीति है।
‘यह नफरत नहीं तो क्या है?’
ओवैसी ने आरोप लगाया कि असम में मुसलमानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “अगर इसे नफरत नहीं कहा जाएगा, तो फिर नफरत किसे कहेंगे?”
उन्होंने हिमंत बिस्वा शर्मा को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “सुन लीजिए, हम आपकी धमकियों और इशारों से डरने वाले नहीं हैं। मुसलमान अगर जिंदा है, तो अल्लाह की रहमत से है।”
‘डर के साये में नहीं जिएंगे’
ओवैसी ने आगे कहा कि मौत तो हर इंसान को आनी है, लेकिन अगर किसी की गोली से उनकी जान जाती है, तो वे शहीद कहलाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे जिंदा रहे, तो लोग उन्हें हक के लिए लड़ने वाला कहेंगे। ओवैसी के मुताबिक, मुसलमान कभी भी अपना जमीर बेचकर डर के माहौल में जीने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि यह विवाद उस समय भड़का जब असम के मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे एक टारगेट पर फायरिंग करते दिखाई दे रहे थे। विपक्षी दलों और कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उस टारगेट पर एक मुस्लिम युवक की तस्वीर थी, जिसे सांप्रदायिक उकसावे से जोड़कर देखा गया।
चुनाव के लिए नफरत की राजनीति का आरोप
ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम को असम में चुनावी फायदे के लिए अपनाई जा रही नफरत की राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया देख रही है कि किस तरह एक छोटे से चुनाव को जीतने के लिए समाज में ज़हर घोला जा रहा है। AIMIM प्रमुख ने चेताया कि इस तरह की बयानबाज़ी और प्रतीकात्मक हरकतें लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं।













