
अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को नोटिस जारी किया है। यह आदेश उस याचिका पर दिया गया, जिसे पायलट-इन-कमांड रहे सुमित सबरवाल के पिता पुष्करराज सबरवाल ने दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस दुखद दुर्घटना के लिए पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
पायलट के पिता ने की न्यायिक जांच की मांग
दिवंगत पायलट सुमित सबरवाल के पिता ने अपनी याचिका में विमान हादसे की न्यायिक जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की मृत्यु के बाद बिना पूरी जांच किए ही कुछ रिपोर्टों में उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बताया जा रहा है, जो अनुचित है। वहीं, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने भी इसी मुद्दे पर एक अलग याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुमित के पिता को आश्वस्त करते हुए कहा,“यह एक बेहद दुखद दुर्घटना थी। लेकिन आपको यह चिंता नहीं करनी चाहिए कि आपके बेटे को किसी ने दोषी ठहराया है। ऐसा कुछ नहीं है।”
एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कोर्ट का हस्तक्षेप
दरअसल, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने जुलाई में जारी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया था कि उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों को ईंधन की आपूर्ति अचानक बंद हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन नियंत्रण स्विच एक-एक करके “कटऑफ” मोड में चले गए थे। लगभग 10 सेकंड बाद स्विच को वापस “ऑन” किया गया, लेकिन तब तक इंजन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके थे, जिसके चलते विमान को नियंत्रित करना असंभव हो गया।
12 जून को हुआ था बड़ा हादसा
यह दर्दनाक हादसा 12 जून को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ के 90 सेकंड के भीतर ही दोनों इंजनों ने काम करना बंद कर दिया, जिससे विमान तेजी से नीचे गिर गया। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 34 अन्य घायल यात्रियों ने बाद में दम तोड़ दिया। कुल मिलाकर 275 से अधिक लोगों की जान गई, जो देश की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में से एक साबित हुई।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार और DGCA से विस्तृत जवाब मांगा है और पायलट के पिता को भरोसा दिलाया कि उनके बेटे की पेशेवर ईमानदारी और कार्यकुशलता पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा रहा है।














