योगगुरु स्वामी रामदेव ने अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के एक पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से बरी होने के बाद गंभीर दावा किया है। रामदेव के मुताबिक, बालकृष्ण को लंबे समय तक जेल में रखकर उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद उन्हें जेल भेजकर पतंजलि को खत्म करने की योजना थी। रामदेव ने कहा कि अदालत के फैसले से यह कथित साजिश नाकाम हो गई।
15 साल पुराने मामले में मिली राहत
आचार्य बालकृष्ण को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और फर्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले में सीबीआई अदालत से राहत मिली है। मामला करीब 15 साल पुराना है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष बालकृष्ण के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रहा।
मंगलवार को अदालत के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में स्वामी रामदेव ने बालकृष्ण को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले के दौरान बालकृष्ण को लंबे समय तक मानसिक प्रताड़ना, अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ा।
रामदेव ने लगाया साजिश का आरोप
रामदेव ने आरोप लगाया कि आचार्य बालकृष्ण को वर्षों तक जेल में रखने और वहीं उनकी हत्या करने की योजना बनाई गई थी। उनके मुताबिक, इसके बाद उन्हें भी जेल में डालकर पतंजलि को खत्म करने की साजिश थी।
रामदेव ने कहा कि बालकृष्ण को 15 वर्षों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उन्हें अपमान तथा अपयश सहना पड़ा। उन्होंने अदालत के फैसले को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कथित साजिश विफल हो गई।
2011 में सीबीआई ने शुरू की थी जांच
आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ यह मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया गया था। संदर्भ सामग्री के अनुसार, शिकायत में उनके नेपाली नागरिक होने और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने का आरोप लगाया गया था। इसी शिकायत के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और फर्जी पासपोर्ट तैयार करने से जुड़े आरोप लगाए गए थे। हालांकि, हालिया फैसले में अभियोजन पक्ष इन आरोपों को अदालत में साबित नहीं कर सका।
फैसले के बाद बालकृष्ण ने क्या कहा?
अदालत से बरी होने के बाद आचार्य बालकृष्ण ने न्याय व्यवस्था पर अपना भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से न्याय व्यवस्था पर विश्वास था, लेकिन इतनी लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया उनके लिए बेहद थकाने वाली रही।
बालकृष्ण के अनुसार, इस दौरान उन्हें अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लोगों की नकारात्मक ऊर्जा का सामना करना पड़ा। आखिरकार अदालत के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिल गया है।














