क्या आपके बच्चे नहीं बना पा रहे है दोस्त, जानें वजह और इस परेशानी को दूर करने के तरीके

By: Ankur Wed, 17 Nov 2021 5:44 PM

क्या आपके बच्चे नहीं बना पा रहे है दोस्त, जानें वजह और इस परेशानी को दूर करने के तरीके

हर बच्चे का अपना अलग स्वभाव होता हैं जिसके अनुरूप वह लोगों से मिलता हैं और बातचीत करता हैं। कुछ बच्चे मिलनसार स्वभाव के होते हैं जो जल्दी ही अपने दोस्त बना लेते हैं। लेकिन कुछ बच्चों के साथ परेशानी आती हैं कि वे खुलकर बात नहीं कर पाते हैं और उनके दोस्त नहीं बन पाते हैं। इस वजह से वे खुद को अकेला महसूस करने लग जाते हैं। इसके चलते बच्चों के पेरेंट्स भी परेशान रहते हैं कि आखिर उनके बच्चे का कोई दोस्त क्यों नहीं बन पाता हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए इसके पीछे की वजह और इसे दूर करने के तरीको की जानकारी लेकर आए हैं। हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने बच्‍चे को दोस्‍त बनाने में हेल्‍प कर सकते हैं। तो आइये जानते हैं इसके बारे मे।

शर्मीला होना


बच्चों की आदत अलग-अलग होती है, ऐसे में ज्यादातर बच्चों की आदत होती है कि वो बहुत ज्यादा शर्मीले होते हैं और किसी से भी बात करने में उन्हें शर्म आती है। इससे उनके साथ वाले बच्चे उनसे सही तरीके से बातचीन नहीं कर पाते, न ही वो उन्हें अच्छी तरह से कुछ बता पाते हैं। इसके कारण दूसरे बच्चे आपसे दूर रहने की कोशिश करते हैं। इस आदत को बदलने के लिए पैरैंट्स अपने बच्चों को रोजाना दूसरों से बात करना सिखाएं, उन्हें बोलने की आदत दें और सिखाएं कि अगर सामने वाला कुछ बोलता है तो उससे बात कैसे की जाए।

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सामाजिक परेशानी

ज्यादातर बच्चों में ये आदत होती है कि वो किसी से भी जल्दी खुल नहीं पाते और और उनसे बात करने में हिचकिचाते हैं। दोस्त न बनने का एक मुख्य कारण ये भी होता है कि बच्चे सामाजिक परेशानियों का सामना करते हैं। इसेस आपका बच्चा दोस्त बनाने में भी हमेशा पीछे रहता है और दूसरों में बहुत कम दिलचस्पी दिखाता है। इसके लिए आप बच्चों को बाहर लेकर जाएं लोगों से बात कराएं और उन्हें बोलने की आदत सिखाएं।

चिड़चिड़ापन


बच्चों का चिड़चि़ड़ापन उनके लिए बहुत बुरी आदत के रूप में देखा जाता है, इस आदत के कारण अक्सर दूसरे बच्चे बात नहीं करना चाहते। ऐसा इसलिए क्योंकि जब किसी बच्चे की आदत चिड़चिड़ी हो जाती है तो वो हमेशा सबसे लड़ाई करना, चिड़चिड़ेपन में बात करना और किसी को भी डांटने जैसी हरकतें करता है। इस कारण दूसरे बच्चे उन बच्चों से दूर रहना ही पसंद करते हैं। ये आदत बड़े होने के बाद गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती है इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चों को इस आदत से दूर करें। इसके लिए आप उन्हें गुस्सा न करने की आदत, लड़ाई न करना और दूसरों के साथ प्यार से बात करने की आदत दें।

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झूठ बोलना
झूठ बोलना बड़ा हो या बच्चा हर किसी के लिए एक बुरी आदत होती है। जब आपका बच्चा किसी से झूठ बोलता है और पकड़ा जाता है तो दूसरे बच्चे ऐसे बच्चों से दूर रहते हैं। बच्चों को झूठ बोलने की आदत माता-पिता को जल्द से जल्द छुड़ानी चाहिए। इससे वो हमेशा सच बोलेंगे और सचाई के साथ चलना सीखेंगे।

इस तरह करें बच्चों की मदद और जगाएं आत्‍मविश्‍वास

सोशल एंग्‍जायटी करें दूर

कुछ बच्‍चों को अजनबियों या नए लोगों से बात करने में हिचक महसूस होती है। ऐसे में बच्‍चे या तो अजीब व्‍यवहार करने लगते हैं या बात करने से ही कतराते हैं। इससे उनके नए दोस्‍त बन पाना और भी मुश्किल हो जाता है। पेरेंट्स को बच्‍चों की सोशल एंग्‍जायटी यानि लोगों से बात करने में हिचक या डर महसूस होने की प्रवृत्ति को दूर करने में मदद करनी चाहिए। बच्‍चों की मुश्किलों को सुलझाने की क्षमता में भी सुधार करें। उन्‍हें समय दें और दोस्‍त बनाने या लोगों से घुलने-मिलने के लिए जबरदस्‍ती न करें।

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प्‍यार से आएं पेश

स्‍वार्थी और अपने से ही प्‍यार करने वाला इंसान, किसी को पसंद नहीं आता है। बच्‍चों को भी ऐसे लोगों के आसपास रहना अच्‍छा नहीं लगता है जो सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हों। इसलिए आप भी अपने बच्‍चे को इस तरह के अवगुणों से दूर रखने की कोशिश करें। उसे दयालु और दूसरों की मदद करने वाला बनाएं। इस तरह बाकी लोग उसे अपने बराबर मानकर उससे दोस्‍ती करने के लिए खुद हाथ बढ़ाएंगे।

भावनाओं को व्‍यक्‍त करना सिखाएं


हर बच्‍चा इतना एक्टिव नहीं होता है कि अपने मन की बात खुलकर बता पाए। दोस्‍ती में आप खूब बातें करते हैं और अपने मन की हर बात शेयर करते हैं। इसलिए दोस्‍त बनाने के लिए आपको अपने बच्‍चे को अपने इमोशंस और बातें शेयर करना सिखाना होगा। उसे बताएं कि वो अपने दोस्‍तों से अपनी हर बात शेयर कर सकता है। उन्‍हें बात शुरू करने की ट्रिक्‍स और टिप्‍स भी दें।

फन एक्टिविटीज


एक्टिविटीज में बच्‍चों को बहुत मजा आता है और इस दौरान वो आसानी से एक-दूसरे के साथ घुल-मिल पाते हैं। बच्‍चों के लिए फन एक्टिविटीज शुरू करें और उसमें प्रतियोगिता की बजाय सहयोग करना सिखाएं। इससे बच्‍चे सोशल स्किल्‍स सीख पाएंगे। अगर आपको अपने बच्‍चे के व्‍यवहार में कोई नेगेटिविटी दिख रही है तो इसे नजरअंदाज न करें। यदि उसे बहुत जल्‍दी गुस्‍सा आ जाता है तो उसे इस आदत को कंट्रोल करना सिखाएं। आप उसे गुस्‍से को कंट्रोल करने के तरीके बताएं और इससे होने वाले नुकसानों के बारे में भी बताएं।

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