
ब्रज की होली का नाम सुनते ही रंग, उमंग और भक्ति का अनोखा संगम आंखों के सामने जीवंत हो उठता है। मथुरा-वृंदावन की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव है, जिसे श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जोड़ा जाता है। फाल्गुन मास में पूरा ब्रज क्षेत्र अबीर-गुलाल और प्रेम के रंगों में डूब जाता है।
हालांकि ब्रज मंडल के हर कस्बे की होली का अपना अलग आकर्षण है, लेकिन बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली का जिक्र आते ही उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। यह अनोखी परंपरा मुख्य होली से कुछ दिन पहले मनाई जाती है और इसे देखने देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। अगर आप भी 2026 में बरसाना की लट्ठमार होली का अनुभव करना चाहते हैं, तो तारीख और समय पहले से नोट कर लें।
बरसाना लट्ठमार होली 2026 की तिथि
साल 2026 में बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को खेली जाएगी। यह दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ रहा है। परंपरा के अनुसार इस दिन नंदगांव के हुरियारे (गोप) बरसाना पहुंचते हैं और वहां की महिलाएं, जिन्हें हुरियारिन कहा जाता है, प्रतीकात्मक रूप से लाठियों से उनका स्वागत करती हैं।
बरसाना को राधा रानी की जन्मभूमि माना जाता है, इसलिए इस दिन गांव की महिलाएं राधा और उनकी सखियों के रूप में सजी-धजी नजर आती हैं। लोकगीत, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक रस्मों के बीच यह आयोजन पूरे जोश और उल्लास के साथ संपन्न होता है।
किस समय शुरू होती है लट्ठमार होली?
बरसाना में लट्ठमार होली का कार्यक्रम मंदिर की परंपरागत रस्मों और श्रद्धालुओं की भीड़ पर निर्भर करता है। मुख्य आयोजन वाले दिन सुबह करीब 5:00 से 5:30 बजे के बीच मंदिरों के कपाट खुल जाते हैं। श्रद्धालु मंगला आरती में शामिल होकर दिन की शुरुआत करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
रंगों और लाठियों का मुख्य उत्सव प्रायः सुबह 9:30 बजे से 11:00 बजे के बीच आरंभ होता है और दोपहर तक चलता रहता है। लगभग 10:30 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है। इसी दौरान पारंपरिक गीत-संगीत, रंगों की बौछार और सांस्कृतिक रस्में अपने चरम पर होती हैं।
दर्शकों के लिए जरूरी जानकारी
यदि आप आयोजन का नजदीक से आनंद लेना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा, जिससे बैठने या खड़े होने के लिए उपयुक्त स्थान मिल सके। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। होली के दौरान मुख्य क्षेत्र में आम लोगों का बहुत करीब जाना प्रतिबंधित रहता है।
फोटोग्राफी की अनुमति आमतौर पर निर्धारित दूरी से दी जाती है, ताकि उत्सव की गरिमा और सुरक्षा दोनों बनी रहें। इसलिए कैमरा लेकर जाने वाले श्रद्धालु और पर्यटक निर्धारित नियमों का पालन अवश्य करें।
बरसाना की लट्ठमार होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। अगर आप ब्रज की अनूठी होली को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं, तो 27 फरवरी 2026 की तारीख अभी से अपने कैलेंडर में दर्ज कर लें।














