
गर्दन, आंखों के आस-पास या हाथ-पैरों पर जब कोई छोटा सा उभरा हुआ दाना नजर आता है, जो न तो दर्द करता है और न ही उसमें खुजली होती है, तब भी वह चिंता का विषय बन सकता है। हम बात कर रहे हैं मस्सों (Warts) की। अक्सर लोग इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है।
मस्से केवल देखने में खराब नहीं लगते, बल्कि ह यकभी-कभी आपके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव, वायरस के संक्रमण या कमजोर इम्युनिटी की चेतावनी भी हो सकते हैं। तो आइए जानें कि ये मस्से क्यों निकलते हैं, कब इनसे सतर्क हो जाना चाहिए और क्या है इनका इलाज।
मस्से क्यों निकलते हैं?
वायरल इन्फेक्शन: अधिकतर मस्से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होते हैं, जो त्वचा की ऊपरी सतह को संक्रमित कर देता है।
हॉर्मोनल असंतुलन: प्रेगनेंसी, थायरॉइड गड़बड़ी या मेनोपॉज़ के समय हार्मोनल बदलाव त्वचा पर मस्से पैदा कर सकते हैं।
मोटापा: शरीर के उन हिस्सों पर जहां त्वचा आपस में रगड़ खाती है—जैसे गर्दन, बगल या पेट—वहां मस्से बनने की संभावना बढ़ जाती है।
डायबिटीज और इंसुलिन रेसिस्टेंस: हाई ब्लड शुगर और इंसुलिन की गड़बड़ी शरीर में मस्सों को जन्म दे सकती है।
कब समझें कि यह खतरे की घंटी है?
जब मस्सा अचानक तेजी से बढ़ने लगे
अगर उसमें से खून निकलने लगे या वह दर्द करने लगे
रंग या बनावट में अचानक बदलाव आए
मस्सों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगे
इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
मस्सों के इलाज और घरेलू उपाय:
एप्पल साइडर विनेगर: रुई में एप्पल साइडर विनेगर लगाकर मस्से पर लगाने से यह धीरे-धीरे सूखने लगता है।
लहसुन का रस: इसमें पाए जाने वाले एंटीवायरल तत्व मस्से के वायरस को नष्ट करने में मदद करते हैं।
डॉक्टरी इलाज: डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर क्रीम, क्रायोथेरेपी या लेज़र ट्रीटमेंट जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














