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डोनाल्ड ट्रंप की बीमारी को लेकर मचा हड़कंप, जानें कितना है खतरा और क्या है इलाज का तरीका

डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मेडिकल रिपोर्ट में एक गंभीर नस संबंधी बीमारी "क्रॉनिक वीनस इनसफिशियंसी" का खुलासा हुआ है। जानिए इस बीमारी के लक्षण, खतरे और इसके प्रभावी इलाज के बारे में विस्तार से, जिससे दुनिया भर में लोग चिंतित हैं।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Sat, 19 July 2025 1:36:04

डोनाल्ड ट्रंप की बीमारी को लेकर मचा हड़कंप, जानें कितना है खतरा और क्या है इलाज का तरीका

दुनिया के सबसे चर्चित और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप की सेहत को लेकर हाल ही में सामने आई एक मेडिकल रिपोर्ट ने सभी को चौंका कर रख दिया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद आम लोगों से लेकर राजनीति के गलियारों तक में हलचल मच गई है। अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है—आखिर ट्रंप को हुआ क्या है? क्या यह कोई गंभीर बीमारी है? क्या इसका इलाज संभव है?

जब कोई बड़ा नेता बीमार पड़ता है, तो सिर्फ उनका परिवार या देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया सांसें थाम लेती है। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ है।

दरअसल, ट्रंप की मेडिकल रिपोर्ट में एक नसों से जुड़ी बीमारी का ज़िक्र किया गया है, जिसे मेडिकल भाषा में क्रॉनिक वीनस इनसफिशियंसी (Chronic Venous Insufficiency) कहा जाता है। यह बीमारी क्या होती है, इसके लक्षण क्या हैं, कितना खतरा है और इसका इलाज क्या है—इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आइए विस्तार से समझते हैं...

आखिर क्या है यह बीमारी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों की नसें ठीक से काम नहीं करतीं। आमतौर पर इन नसों में मौजूद वॉल्व (valves) रक्त को हृदय की ओर ले जाने में मदद करते हैं। लेकिन जब ये वॉल्व कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो रक्त वापस पैरों में जमा होने लगता है। इसके कारण व्यक्ति को सूजन, दर्द और भारीपन जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं, जो समय के साथ बढ़ सकती हैं।

क्रॉनिक वीनस इनसफिशियंसी के सामान्य लक्षण:

पैरों में लगातार भारीपन या थकान महसूस होना: लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के बाद पैरों में थकावट और भारीपन का अहसास होता है, जिससे चलना-फिरना कठिन लग सकता है।

टखनों और पिंडलियों में सूजन आ जाना: दिन के अंत में खासकर टखनों के आसपास सूजन आ जाती है, जो सोने के बाद कुछ कम हो सकती है।

पैरों की त्वचा का रंग काला या भूरा पड़ जाना: त्वचा में रक्त के सही तरीके से न बहने के कारण रंग गहरा हो जाता है, विशेषकर टखनों के आसपास।

त्वचा पर लगातार खुजली या जलन रहना: प्रभावित हिस्से में ड्रायनेस और इरिटेशन के कारण खुजली और जलन बनी रहती है, जिससे एक्जिमा जैसी स्थिति बन सकती है।

लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द का बढ़ना: यदि व्यक्ति अधिक देर तक खड़ा रहे, तो दर्द और असहजता में वृद्धि हो जाती है।

पैरों में ऐसे घाव या अल्सर होना जो बहुत देर से भरते हैं: विशेषकर टखनों के पास ऐसे जख्म बन सकते हैं जो आसानी से ठीक नहीं होते, इन्हें "वेनस अल्सर" कहा जाता है।

क्या यह बीमारी खतरनाक है?

हालांकि यह बीमारी सीधे तौर पर जानलेवा नहीं मानी जाती, लेकिन अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह धीरे-धीरे व्यक्ति की जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। कल्पना कीजिए, जब किसी को रोज़मर्रा की साधारण गतिविधियों—जैसे चलना, खड़ा रहना या थोड़ा-सा काम करना भी मुश्किल लगने लगे—तो उसका मानसिक तनाव और तकलीफ कितनी बढ़ जाती होगी। यही कारण है कि इस बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

क्या इसका इलाज संभव है?

जी हाँ, राहत की बात यह है कि क्रॉनिक वीनस इनसफिशियंसी (CVI) का इलाज पूरी तरह संभव है। हालांकि, इलाज का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी की स्थिति कितनी गंभीर है और व्यक्ति की जीवनशैली कैसी है। समय पर पहचान और सही देखभाल से इसके लक्षणों में काफी हद तक सुधार किया जा सकता है।

1. लाइफस्टाइल में बदलाव

सबसे पहला कदम होता है जीवनशैली में जरूरी बदलाव लाना:

शरीर का वजन नियंत्रित रखें, ताकि पैरों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

रोज़ाना कम से कम 30 मिनट टहलने की आदत डालें।

लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े या बैठे रहने से बचें।

पैरों को ऊँचाई पर रखने से रक्त प्रवाह बेहतर होता है।

2. कॉम्प्रेशन स्टॉकिंग्स का उपयोग

यह विशेष प्रकार के मोज़े होते हैं जो पैरों में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और:

सूजन को कम करते हैं

भारीपन और दर्द को नियंत्रित करते हैं

नसों में रक्त रुकावट को रोकते हैं

3. दवाइयों से उपचार


डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार कुछ विशेष दवाइयाँ दे सकते हैं जो:

सूजन और जलन को कम करें

दर्द से राहत दें

नसों की दीवारों को मजबूत बनाने में सहायक हों

4. लेजर ट्रीटमेंट या सर्जरी

अगर समस्या बहुत गंभीर हो जाए, जैसे कि नसें बहुत उभरी हुई हों या चलने-फिरने में कठिनाई हो, तो डॉक्टर निम्न विकल्प सुझा सकते हैं:

लेजर थेरेपी: इसमें प्रभावित नसों को बंद किया जाता है ताकि रक्त सही दिशा में बह सके।

सर्जिकल प्रक्रिया: गंभीर मामलों में नसों को हटाने या सुधारने के लिए ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है।

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