
अगर आप हर खाने में एक्स्ट्रा क्रिस्पीनेस और ग्रिलिंग के दीवाने हैं, तो अब आपको सतर्क हो जाना चाहिए। आपकी ये फूड हैबिट धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए खतरनाक बन सकती है। हाल ही में डॉक्टर तरंग कृष्णा ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो साझा किया है, जो इस ओर इशारा करता है कि जली हुई तंदूरी रोटी, अधिक तली हुई ब्रेड या ओवरक्रिस्पी फूड्स कितने नुकसानदेह हो सकते हैं।
अधिकतर लोग क्रिस्पी और सुनहरे भूरे रंग के स्नैक्स को स्वादिष्ट मानते हैं — चाहे वह आलू के चिप्स हों, कुरकुरे पकौड़े या थोड़ी जली हुई रोटियां। लेकिन स्वाद के इस आकर्षण के पीछे छिपा है एक धीमा ज़हर, जो आपकी सेहत को लंबे समय में गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
ज़्यादा तली या जली हुई चीज़ें खाने के नुकसान
1. पाचन तंत्र की गड़बड़ी
अत्यधिक फ्राइड या जले हुए खाने को पचाना कठिन होता है। जब लंबे समय तक ऐसे भोजन का सेवन किया जाए, तो यह आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को कमजोर बना सकता है। उच्च तापमान पर पकने के कारण ऐसे खाने में मौजूद जरूरी फाइबर और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे गैस, सूजन, कब्ज और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2. कैंसर का बढ़ता खतरा
जले हुए खाद्य पदार्थों में एक्रिलामाइड (Acrylamide) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) जैसे तत्व विकसित हो जाते हैं। ये दोनों रसायन कैंसर उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं और विशेष रूप से जले हुए चिप्स, तंदूरी रोटी या मीट में पाए जाते हैं। इनके लंबे समय तक सेवन से आंत, पेट या अन्य अंगों में कैंसर की संभावना बढ़ सकती है।
3. ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी
जब खाना बहुत अधिक तापमान पर पकाया या जलाया जाता है, तो उसमें मौजूद कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं। जैसे विटामिन C, B-complex, पोटैशियम और मैग्नीशियम। इससे शरीर को पोषण नहीं मिल पाता और थकान, कमजोरी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
4. स्वाद और सुगंध में गिरावट
जब खाना अधिक पक जाता है या जल जाता है, तो उसमें मौजूद शुगर और प्रोटीन जलकर कड़वाहट और अप्रिय गंध उत्पन्न करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि भोजन का स्वाद बिगड़ जाता है और व्यक्ति की भूख में कमी आ सकती है।
5. दिल पर बुरा असर
अत्यधिक तली हुई चीज़ों में ट्रांस फैट और ऑक्सीकृत वसा मौजूद होते हैं जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करते हैं। इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है और हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














