
राम चरण की पत्नी और अपोलो हॉस्पिटल्स की वाइस चेयरपर्सन उपासना कामिनेनी ने एक बेहद सोच-समझ कर लिखा गया प्रेरक संदेश अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया है, जो अब सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। उन्होंने अपने इस मैसेज के ज़रिए लड़कियों को समाज की रूढ़ियों से बाहर सोचने और शादी को ज़रूरत नहीं, विकल्प मानने की हिम्मत दी है। उपासना ने एक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संग हुई क्लास का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे महिलाएं अक्सर सामाजिक दबाव, पैसा या स्टेटस को देखकर शादी का निर्णय लेती हैं – जबकि होना इसके ठीक उलट चाहिए।
पैसों या स्टेटस के लिए शादी मत करो, सही पार्टनर मिले तभी करो
उपासना ने लिखा – “मैं एक प्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से हूं, लेकिन मैंने महसूस किया है कि शहरी इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं खुद को शादी में फंसा महसूस करती हैं। वे अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को पीछे छोड़कर केवल सामाजिक अपेक्षाओं के चलते शादी करती हैं।"
उन्होंने आगे लिखा – “लड़कियों को चाहिए कि जब उनका 'राम' मिले तभी शादी करें, वरना अकेले रहना भी उतना ही सशक्त निर्णय है। पैसे या स्टेटस के लिए शादी करना खतरनाक हो सकता है। जो चीज़ें मिलकर बनाई जा सकती हैं, उनके लिए पहले सही साथी चुनना जरूरी है।”
मर्द नहीं, ज़रूरत है एक समान सोच वाले पार्टनर की
उपासना ने खास तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया कि आज के समय में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और कई बार अपने आस-पास के पुरुषों से कहीं ज्यादा सफल भी। उन्होंने लिखा, “अब महिलाओं को मर्द की ज़रूरत नहीं, बल्कि एक ऐसे पार्टनर की ज़रूरत है जो उन्हें बराबरी पर रखे, उनका सम्मान करे और उनका आत्मबल बनाए रखे।" उन्होंने इस सोच को बदलने के लिए समाज में जागरूकता लाने पर ज़ोर दिया।
घरेलू हिंसा: हत्या की तीसरी सबसे बड़ी वजह
अपने मैसेज में उपासना ने नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि भारत में घरेलू झगड़े हत्याओं की तीसरी सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं। उन्होंने कहा – “जब घर सुरक्षित और सशक्त होंगे तभी देश भी प्रगति करेगा।”
शादी के लिए लड़कियों पर न बनाएं दबाव
उपासना ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि “लड़कियों को समय से शादी के लिए मजबूर न करें। उन्हें उनकी गति से बढ़ने दें। उनके आत्मविश्वास को पंख दें, ताकि वे डर नहीं, हिम्मत के साथ जीवन के फैसले लें।” उन्होंने सलाह दी – “अपने लड़कों को भी भावनाओं को समझना और सीमाएं तय करना सिखाएं। फर्क को सम्मान देना सिखाएं।”














