Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

उमराव जान की वापसी और शायरी की खामोश गहराइयों से निकली एक आवाज़ — शहरयार

फिर एक बार, जब क्लासिक फिल्म उमराव जान सिनेमाघरों में वापसी कर रही है, दर्शक न केवल रेखा की अदाकारी को फिर से देखने के लिए उत्साहित हैं, बल्कि उन गीतों को भी दोबारा सुनने के लिए उत्सुक हैं, जो आज भी हमारे ज़ेहन में बसते हैं।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Mon, 16 Jun 2025 9:21:25

उमराव जान की वापसी और शायरी की खामोश गहराइयों से निकली एक आवाज़ — शहरयार

फिर एक बार, जब क्लासिक फिल्म 'उमराव जान' सिनेमाघरों में वापसी कर रही है, दर्शक न केवल रेखा की अदाकारी को फिर से देखने के लिए उत्साहित हैं, बल्कि उन गीतों को भी दोबारा सुनने के लिए उत्सुक हैं, जो आज भी हमारे ज़ेहन में बसते हैं। 'इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं' या 'दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिए' जैसे नग़मे सिर्फ संगीत नहीं हैं, बल्कि शायरी की वह पराकाष्ठा हैं, जिन्हें शहरयार ने रचा था। वह शायर जिसने शायरी को सादगी से संवेदनाओं की ऊंचाई तक पहुंचाया और उर्दू अदब को एक नई पहचान दी।

"सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है।"

यह शेर उर्दू अदब की उस बेजोड़ आवाज़ का हिस्सा है, जिसने न सिर्फ ग़ज़लों को नया जीवन दिया, बल्कि भावनाओं को सरलतम शब्दों में ढाल कर हर दिल की धड़कन बना दिया। वह शायर थे अखलाक मुहम्मद खान 'शहरयार'— एक ऐसा नाम जो साहित्य और सिनेमा, दोनों की दुनिया में गूंजता रहा। उनकी शायरी में आधुनिक जीवन की जटिलताएं, प्रेम की नज़ाकत और अकेलेपन की टीस सब कुछ इतनी सहजता से समाहित होता है कि पढ़ने वाले को भीतर तक छू जाता है।

जन्म और आरंभिक जीवन


16 जून 1936 को उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के आंवला कस्बे में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे अखलाक मुहम्मद खान ने बाद में 'शहरयार' के नाम से साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाई। उनके पिता अबू मुहम्मद खान पुलिस अधिकारी थे और चाहते थे कि उनका बेटा भी अफसर बने। मगर साहित्य और शायरी के लिए शहरयार की आत्मा पुकार रही थी। हरदोई में आरंभिक शिक्षा के बाद वे 1948 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) चले गए, जहां उन्होंने उर्दू में स्नातकोत्तर किया।

साहित्यिक यात्रा और शायरी की शुरुआत

1960 के दशक में ही उन्होंने शायरी में अपने कदम रख दिए थे। उनका रुझान पारंपरिक उर्दू शायरी की ओर तो था, मगर उन्होंने उसमें आधुनिक जीवन की समस्याओं और संवेदनाओं का ऐसा समावेश किया कि उनकी रचनाएं एक नए युग का सूत्रपात करने लगीं। मशहूर उर्दू शायर खलील-उर-रहमान आजमी की संगत ने उनकी रचनाओं को और भी निखारा।

शहरयार ने अपना तखल्लुस इसी दौरान अपनाया और 1965 में उनका पहला काव्य-संग्रह ‘इस्म-ए-आजम’ प्रकाशित हुआ। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान 1987 में आए संग्रह ‘ख्वाब का दर बंद है’ से मिली, जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
आधुनिकता और परंपरा का संगम

शहरयार उन गिने-चुने शायरों में से हैं, जिन्होंने परंपरागत उर्दू शायरी को बनाए रखते हुए उसमें समकालीन जीवन की जद्दोजहद को भी शामिल किया। उनकी शायरी में प्रेम, अकेलापन, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय रिश्तों की जटिलताएं बेहद खूबसूरती से गूंथी गई हैं। वे फिराक गोरखपुरी, अली सरदार जाफरी और कुर्रतुलऐन हैदर के बाद चौथे ऐसे उर्दू साहित्यकार बने जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

फिल्मों से साहित्य तक — शब्दों का सफर


हालांकि शहरयार ने खुद को कभी 'फिल्मी शायर' नहीं माना, लेकिन उनके लिखे कुछ गीत आज भी अमर हैं। उनके मित्र और फिल्म निर्देशक मुजफ्फर अली के कहने पर उन्होंने फिल्म ‘गमन’ (1978), ‘उमराव जान’ (1981) और ‘अंजुमन’ जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे।

‘इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं’,

‘दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिए’,

‘जुस्तजू जिसकी थी, उसको तो न पाया हमने’

जैसे गीत आज भी उनकी पहचान बन गए हैं।


उनकी गीतों की खासियत यह थी कि वे फिल्मी होते हुए भी साहित्यिक ऊंचाई बनाए रखते थे। उन्होंने कभी व्यावसायिक फिल्मों के लिए लेखन को करियर नहीं बनाया, बल्कि साहित्य को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा।

भावनाओं की भाषा उनकी शायरी की विशेषताएं


शहरयार की शायरी में दर्द का एक सलीका है। वे उदासी को इस तरह प्रस्तुत करते हैं जैसे वह जीवन की एक स्वाभाविक अवस्था हो।

उनका एक और प्रसिद्ध शेर —

“हर मुलाकात का अंजाम जुदाई क्यों है,

अब तो हर वक्त यही बात सताती है हमें।”


मानवीय रिश्तों की अस्थिरता और अधूरी चाहतों को बेहद प्रभावी ढंग से दर्शाता है।

उनकी शायरी में प्रेम, संकोच, सामाजिक विडंबना और आत्मचिंतन का ऐसा संगम है जो बहुत कम रचनाकारों में देखने को मिलता है। उन्होंने कभी भी शब्दों का आडंबर नहीं रचा, बल्कि सादगी को अपना हथियार बनाया।

एक अध्यापक, एक संपादक, एक विचारक


शहरयार केवल शायर ही नहीं, एक शिक्षाविद और विचारशील आलोचक भी थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में वह उर्दू विभाग के प्रमुख भी रहे। वे लंबे समय तक साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे और उर्दू साहित्य में नए लेखकों को मंच देने का कार्य भी किया।

अंतिम पड़ाव, लेकिन अमर स्मृति


13 फरवरी 2012 को शहरयार ने अलीगढ़ में कैंसर के कारण अंतिम सांस ली। लेकिन यह महज़ एक भौतिक विदाई थी, क्योंकि उनकी रचनाएं, उनके शब्द, उनके ख्याल आज भी साहित्यप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं। वह उर्दू शायरी को उस मुकाम पर ले गए जहां हर आम पाठक भी उसमें खुद को देख सके।

चंद अल्फाज शहरयार की शायरी पर


शब्दों में जीवित एक रूह शहरयार की शायरी एक ऐसी दरिया है जिसमें डूबकर इंसान खुद को तलाश सकता है। उन्होंने भावनाओं को किसी जटिल शैली में नहीं, बल्कि इतने सरल रूप में पिरोया कि वे अनपढ़ से लेकर विद्वान तक, हर किसी के दिल में उतर गए।

वे आज भी हमारे बीच हैं — हर बार जब कोई शेर हमें भीतर से झकझोरता है, हर बार जब कोई गीत दिल की धड़कन बन जाता है, तब शहरयार का नाम फिर से ज़िंदा हो उठता है।

उनकी शायरी केवल कविता नहीं, बल्कि जीवन का दस्तावेज़ है — दर्द का, प्रेम का, परिवर्तन का, और उस शांति का जो केवल समझ और संवेदना से आती है।

राज्य
View More

Shorts see more

रेस्टोरेंट से प्लास्टिक के डिब्बे में मंगाते हैं खाना? हो जाएं सतर्क, कहीं कैंसर को तो नहीं दे रहे न्योता!

रेस्टोरेंट से प्लास्टिक के डिब्बे में मंगाते हैं खाना? हो जाएं सतर्क, कहीं कैंसर को तो नहीं दे रहे न्योता!

  • बाहर से खाना मंगवाना अब आम हो गया है
  • रेस्टोरेंट प्लास्टिक कंटेनरों में खाना भेजते हैं
  • गर्म खाने से प्लास्टिक के ज़हरीले केमिकल घुल सकते हैं
read more

ताजा खबरें
View More

‘देश का हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा’, बस्तर में सैनिकों के बीच भावुक हुए पीएम मोदी
‘देश का हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा’, बस्तर में सैनिकों के बीच भावुक हुए पीएम मोदी
दिवाली पर सिर्फ 'हैप्पी दिवाली' नहीं, इन खास संदेशों से अपनों तक पहुंचाएं खुशियों की रोशनी
दिवाली पर सिर्फ 'हैप्पी दिवाली' नहीं, इन खास संदेशों से अपनों तक पहुंचाएं खुशियों की रोशनी
जापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 22 लोग घायल
जापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 22 लोग घायल
विभाजन के दर्द से BJP के निर्माण तक, आडवाणी के जीवन के अनछुए पहलुओं को PM मोदी ने किया याद
विभाजन के दर्द से BJP के निर्माण तक, आडवाणी के जीवन के अनछुए पहलुओं को PM मोदी ने किया याद
Google Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL पर 29,000 रुपये तक की छूट, जानें ऑफर के बाद कितनी रह गई कीमत
Google Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL पर 29,000 रुपये तक की छूट, जानें ऑफर के बाद कितनी रह गई कीमत
झारखंड के खूंटी में भीषण सड़क हादसा, बेकाबू 18 चक्का ट्रक ने 7 लोगों को कुचला
झारखंड के खूंटी में भीषण सड़क हादसा, बेकाबू 18 चक्का ट्रक ने 7 लोगों को कुचला
दिवाली 2026: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विशेष स्तुति का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि
दिवाली 2026: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विशेष स्तुति का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि
सिनेमाघरों से ‘रामायण’ के सीन लीक करना पड़ेगा भारी, मेकर्स ने साफ कहा- तुरंत हटाएं वीडियो
सिनेमाघरों से ‘रामायण’ के सीन लीक करना पड़ेगा भारी, मेकर्स ने साफ कहा- तुरंत हटाएं वीडियो
'हनुमान अंश' की OTT रिलीज डेट कंफर्म, 27 नवंबर से Sony LIV पर देख सकेंगे फिल्म
'हनुमान अंश' की OTT रिलीज डेट कंफर्म, 27 नवंबर से Sony LIV पर देख सकेंगे फिल्म
सलमान खान ने बुजुर्गों को दिया खास तोहफा, सिर्फ 11 रुपये में देख सकेंगे 'मातृभूमि'
सलमान खान ने बुजुर्गों को दिया खास तोहफा, सिर्फ 11 रुपये में देख सकेंगे 'मातृभूमि'
8 नवंबर 2026 राशिफल: दिवाली के दिन इन राशियों के लिए बन रहे हैं तरक्की के योग, जानें किसे बरतनी होगी सावधानी
8 नवंबर 2026 राशिफल: दिवाली के दिन इन राशियों के लिए बन रहे हैं तरक्की के योग, जानें किसे बरतनी होगी सावधानी
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
7 नवंबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा, मेष-कर्क समेत इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत
7 नवंबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा, मेष-कर्क समेत इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका