
90 के दशक के आइकॉनिक अभिनेता दीपक तिजोरी ने एक बार फिर अपनी चर्चित फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ (1992) को लेकर दर्शकों में रोमांच पैदा कर दिया है। तिजोरी ने खुलासा किया है कि अगर मौका मिले तो वे इस फिल्म का सीक्वल बनाना चाहेंगे – इस बार एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि कोच की भूमिका में, और उनके प्रतिद्वंदी कोच होंगे आमिर खान।
'यह कोचों की जंग होगी, देखने लायक युद्ध'
इंडिया टुडे से खास बातचीत में तिजोरी ने कहा, "अगर मुझे किसी पुरानी फिल्म में अपने किसी को-स्टार के साथ दोबारा काम करने का मौका मिले, तो मैं ‘जो जीता वही सिकंदर’ और आमिर खान को चुनूंगा। वह मॉडल स्कूल के कोच बनें, और मैं राजपूत स्कूल का कोच। यह एक ऐसा युद्ध होगा जिसे स्क्रीन पर देखना बेहद रोमांचक होगा।”
तिजोरी ने बताया कि यह फिल्म आज भी कई पीढ़ियों के दिल में बसी हुई है और जनरेशन Z तक इसके किरदारों को याद रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कोई निर्देशक या निर्माता इस विचार को गंभीरता से ले और इस फिल्म को नई पीढ़ी के लिए फिर से जिंदा करे।
90 के दशक की दोस्ती और सहयोग की यादें ताज़ा कीं
बातचीत के दौरान दीपक तिजोरी ने 90 के दशक के फिल्मी माहौल को भी याद किया जहां सितारे एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी और दोस्त हुआ करते थे। उन्होंने कहा, “हम सभी समकालीन थे, लेकिन एक-दूसरे से होड़ नहीं करते थे। कोई कहता – तुम ये सीन ऐसे करो, मैं ऐसे करूंगा।”
उन्होंने ‘पहला नशा’ फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि कैसे शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, राहुल रॉय और अन्य कलाकार सिर्फ एक सीन के लिए फिल्म के प्रीमियर में शामिल हुए – जो आज के दौर में दुर्लभ है।
दीपिका पादुकोण की 8 घंटे वर्क डेबेट पर समर्थन
दीपिका पादुकोण की सेट पर 8 घंटे के कार्यदिवस की मांग पर जारी बहस पर तिजोरी ने समर्थन जताते हुए कहा, “यह ज़रूरी बदलाव है। आज की पीढ़ी के पास वह सपोर्ट सिस्टम नहीं है जो हमारे पास था। अब सब कुछ खुद ही संभालना पड़ता है – बच्चे, परिवार और काम।”
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री अब केवल जुनून नहीं, जिम्मेदारी है, और नई पीढ़ी को अपने अधिकारों और सीमाओं के बारे में मुखर होना भी एक सकारात्मक बदलाव है।
दीपक तिजोरी की आखिरी फिल्म ‘Tipppsy’
दीपक तिजोरी ने हाल ही में 2024 में फिल्म ‘Tipppsy’ के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी संभाली थी, जिसमें वे अभिनय करते हुए भी नजर आए थे। वे इन दिनों निर्देशन और नए प्रोजेक्ट्स की योजनाओं में सक्रिय हैं।
दीपक तिजोरी की यह इच्छा न केवल नॉस्टैल्जिया की लहर लेकर आई है, बल्कि यह फिल्म प्रेमियों के बीच एक नई ऊर्जा भी भर सकती है। अगर ‘जो जीता वही सिकंदर 2’ जैसी कोई परियोजना अस्तित्व में आती है, तो यह 90 के दशक के चाहने वालों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा होगा। अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या आमिर खान इस आइडिया में दिलचस्पी दिखाते हैं या कोई निर्माता इसे गंभीरता से आगे बढ़ाता है।














