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शिवजी को क्यों अर्पित किए जाते हैं आक, धतूरा और भांग? शिवपुराण में बताई गई है इसकी खास वजह

सावन में भगवान शिव को आक, धतूरा और भांग क्यों अर्पित की जाती है? जानिए शिवपुराण, समुद्र मंथन की कथा और इन पूजन सामग्रियों के धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व से जुड़ी खास मान्यताएं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Fri, 07 Aug 2026 11:00:55

शिवजी को क्यों अर्पित किए जाते हैं आक, धतूरा और भांग? शिवपुराण में बताई गई है इसकी खास वजह

सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इस पूरे महीने श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और बेलपत्र, गंगाजल, दूध, भांग, धतूरा तथा आक जैसे पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भगवान शिव को ऐसी वस्तुएं ही क्यों चढ़ाई जाती हैं, जिन्हें सामान्य जीवन में विषैला, अनुपयोगी या कम महत्व का माना जाता है। इसके पीछे केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि शिवपुराण और पौराणिक कथाओं में वर्णित गहरी आध्यात्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है।

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है रहस्य

शिवपुराण और अन्य पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल नामक भयंकर विष निकला था। इस विष की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उससे समस्त सृष्टि के विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया। ऐसे संकट की घड़ी में भगवान शिव ने समस्त जीवों की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया और उसे अपने कंठ में ही रोक लिया।

विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, जिसके बाद उन्हें 'नीलकंठ' के नाम से जाना जाने लगा। भगवान शिव का यह त्याग और करुणा आज भी उनकी सबसे महान लीलाओं में गिना जाता है।

विष की तपन शांत करने के लिए अर्पित किए गए औषधीय पौधे


मान्यता है कि हलाहल विष को धारण करने के बाद भगवान शिव के शरीर में अत्यधिक गर्मी और तपन उत्पन्न हो गई थी। तब देवी-देवताओं और ऋषियों ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए कई औषधीय गुणों वाले पौधे अर्पित किए। इन्हीं में आक, धतूरा और भांग का विशेष स्थान बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पौधों को शीतल प्रभाव वाला माना जाता है। इसलिए भगवान शिव की तपन को शांत करने के उद्देश्य से इन्हें अर्पित किया गया और तभी से शिव पूजा में इनका विशेष महत्व स्थापित हो गया। आज भी सावन और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर श्रद्धालु इन्हें भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

भगवान शिव के स्वरूप से मिलता है गहरा संदेश

भगवान शिव का व्यक्तित्व अन्य सभी देवताओं से अलग और अत्यंत सरल माना जाता है। उन्होंने कभी वैभव और ऐश्वर्य को महत्व नहीं दिया। कैलाश पर्वत को अपना निवास बनाया, शरीर पर भस्म धारण की, गले में नाग को स्थान दिया और ऐसे तत्वों को भी स्वीकार किया जिन्हें समाज अक्सर महत्व नहीं देता।

आक, धतूरा और भांग भी इसी भावना का प्रतीक माने जाते हैं। इन वस्तुओं को भगवान शिव का प्रिय माना जाना यह संदेश देता है कि प्रकृति की प्रत्येक वस्तु का अपना महत्व होता है। किसी भी व्यक्ति या वस्तु का मूल्य केवल उसके बाहरी रूप, उपयोगिता या लोकप्रियता के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। भगवान शिव समभाव, स्वीकार्यता और प्रकृति के प्रत्येक तत्व के सम्मान का संदेश देते हैं।

सावन में इन चीजों का बढ़ जाता है धार्मिक महत्व

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है। इस दौरान श्रद्धालु पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, गंगाजल, भांग, धतूरा और आक अर्पित करते हैं। पौराणिक कथाओं में इन सभी वस्तुओं का उल्लेख भगवान शिव की प्रिय पूजन सामग्री के रूप में मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में अर्पित की जाने वाली सामग्री का अपना महत्व अवश्य है, लेकिन सबसे अधिक मूल्य भक्त की सच्ची श्रद्धा, निष्कपट भक्ति और विश्वास का होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की भावना से प्रसन्न होते हैं और सच्चे मन से की गई आराधना का फल अवश्य प्रदान करते हैं।

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