सनातन परंपरा में श्रावण मास को सबसे पावन समय माना गया है। यह पूरा समय देवाधिदेव महादेव की आराधना और विशेष कृपा प्राप्त करने का होता है। इस पावन अवधि में श्रद्धालु व्रत रखने के साथ ही सात्विक जीवनशैली के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं। हर साल इस मास के आते ही लोगों के मन में यह संशय उत्पन्न होता है कि क्या इस समय के दौरान केश अथवा नाखून काटना हानि पहुंचा सकता है। हमारे प्राचीन ग्रंथों और पुराणों के अनुसार गलत समय पर किए गए इन कार्यों से जीवन में प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
केश और नाखून न काटने के पीछे के मुख्य कारण
धार्मिक दृष्टिकोण के अनुसार यह पूरा समय आत्मिक नियंत्रण, शारीरिक पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा को संचित करने का होता है। इस समय के दौरान इन कार्यों को न करने के पीछे कुछ विशेष कारण बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि साधक इस पावन समय में पवित्रता के नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके द्वारा किए गए अनुष्ठान और साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार इस समय अनुचित रूप से इन कार्यों को करने से व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता बढ़ती है और कई तरह के ग्रह दोष भी उत्पन्न होते हैं। यदि हम मौसमी नजरिए से देखें तो वर्षा ऋतु के दौरान वातावरण में नमी बहुत अधिक होती है। पुराने समय में धारदार उपकरणों से चोट लगने पर संक्रमण फैलने की आशंका बहुत ज्यादा रहती थी, इसी वजह से हमारे मार्गदर्शकों ने इस समय आत्मसंयम बनाए रखने का विधान तय किया था।
सप्ताह के दिनों के अनुसार मिलने वाले परिणाम
हमारे प्राचीन ग्रंथों में सप्ताह के अलग-अलग दिनों में किए जाने वाले इन कार्यों के भिन्न-भिन्न परिणामों का वर्णन मिलता है। सोमवार का दिन पूरी तरह से महादेव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन इन कार्यों को करने से मानसिक अशांति बढ़ती है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। मंगलवार के दिन को इसके लिए बहुत ही अनुचित माना गया है, क्योंकि इससे संकटों का सामना करना पड़ता है। बुधवार के दिन को इसके लिए सबसे उत्तम और कल्याणकारी माना गया है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। गुरुवार के दिन इन कार्यों को करने से दिव्य शक्तियों की कृपा में कमी आती है, जिससे घर में अभाव उत्पन्न होते हैं और बौद्धिक क्षमता प्रभावित होती है। शुक्रवार का दिन भी इन कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है, जिससे जीवन में सुख और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। शनिवार के दिन इन नियमों की अनदेखी करने से न्याय के देवता का प्रकोप झेलना पड़ सकता है, जिससे हर कार्य में बाधाएं आने लगती हैं। रविवार के दिन भी इन कार्यों को करने से मान-सम्मान और धन की हानि होती है।
विशेष तिथियों पर बरती जाने वाली सावधानियां
विभिन्न धार्मिक
मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास के सभी सोमवार, अमावस्या, पूर्णिमा तथा
एकादशी जैसी पवित्र तिथियों पर केश और नाखून काटना पूरी तरह से निषेध माना
गया है। यदि बहुत ज्यादा जरूरत हो, तो केवल बुधवार या शुक्रवार के दिन ही
इस कार्य को संपन्न करना चाहिए। इस पावन समय में इन सभी नियमों का पालन
करने से महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख तथा शांति का
वास होता है।













