
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में राधा-कृष्ण की भव्य सजावट, झांकियां और भजन-कीर्तन से वातावरण उल्लासपूर्ण हो उठता है। घर-घर में भक्त लड्डू गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाते हैं, झूला सजाकर उन्हें झुलाते हैं और विविध प्रकार के व्यंजन व मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। ऐसा विश्वास है कि यदि जन्माष्टमी पर पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा की जाए, तो श्रीकृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है।
108 नामों के जाप का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के 108 पावन नाम बताए गए हैं। जन्माष्टमी पर यदि इन नामों का मन से जाप किया जाए, तो भक्त को विशेष आशीर्वाद मिलता है। इन नामों से प्रभु का स्मरण करने पर न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि पाप नष्ट होते हैं और जीवन की बाधाएं भी दूर होती हैं। शास्त्रों का कहना है कि सच्चे मन से इन नामों का जप करने वाला व्यक्ति दुःखों से मुक्त होकर आनंद की प्राप्ति करता है।
श्रीकृष्ण के 108 नाम
1. कृष्ण
2. कमलनाथ
3. वासुदेव
4. सनातन
5. वसुदेवात्मज
6. पुण्य
7. लीलामानुष विग्रह
8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय
9. यशोदावत्सल
10. हरि
11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा
12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय
13. देवाकीनन्दन
14. श्रीशाय
15. नन्दगोप प्रियात्मज
16. यमुनावेगा संहार
17. बलभद्र प्रियनुज
18. पूतना जीवित हर
19. शकटासुर भञ्जन
20. नन्दव्रज जनानन्दिन
21. सच्चिदानन्दविग्रह
22. नवनीत विलिप्ताङ्ग
23. नवनीतनटन
24. मुचुकुन्द प्रसादक
25. षोडशस्त्री सहस्रेश
26. त्रिभङ्गी
27. मधुराकृत
28. शुकवागमृताब्दीन्दवे
29. गोविन्द
30. योगीपति
31. वत्सवाटि चराय
32. अनन्त
33. धेनुकासुरभञ्जनाय
34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय
35. यमलार्जुन भञ्जन
36. उत्तलोत्तालभेत्रे
37. तमाल श्यामल कृता
38. गोप गोपीश्वर
39. योगी
40. कोटिसूर्य समप्रभा
41. इलापति
42. परंज्योतिष
43. यादवेंद्र
44. यदूद्वहाय
45. वनमालिने
46. पीतवससे
47. पारिजातापहारकाय
48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे
49. गोपाल
50. सर्वपालकाय
51. अजाय
52. निरञ्जन
53. कामजनक
54. कञ्जलोचनाय
55. मधुघ्ने
56. मथुरानाथ
57. द्वारकानायक
58. बलि
59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे
60. तुलसीदाम भूषनाय
61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे
62. नरनारयणात्मकाय
63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय
64. मायिने
65. परमपुरुष
66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय
67. संसारवैरी
68. कंसारिर
69. मुरारी
70. नाराकान्तक
71. अनादि ब्रह्मचारिक
72. कृष्णाव्यसन कर्शक
73. शिशुपालशिरश्छेत्त
74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत
75. विदुराक्रूर वरद
76. विश्वरूपप्रदर्शक
77. सत्यवाचॆ
78. सत्य सङ्कल्प
79. सत्यभामारता
80. जयी
81. सुभद्रा पूर्वज
82. विष्णु
83. भीष्ममुक्ति प्रदायक
84. जगद्गुरू
85. जगन्नाथ
86. वॆणुनाद विशारद
87. वृषभासुर विध्वंसि
88. बाणासुर करान्तकृत
89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे
90. बर्हिबर्हावतंसक
91. पार्थसारथी
92. अव्यक्त
93. गीतामृत महोदधी
94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज
95. दामोदर
96. यज्ञभोक्त
97. दानवेन्द्र विनाशक
98. नारायण
99. परब्रह्म
100. पन्नगाशन वाहन
101. जलक्रीडा समासक्त गोपीवस्त्रापहाराक
102. पुण्य श्लॊक
103. तीर्थकरा
104. वेदवेद्या
105. दयानिधि
106. सर्वभूतात्मका
107. सर्वग्रहरुपी
108. परात्पराय
जन्माष्टमी पूजा का शुभ समय
ज्योतिष गणना के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व विशेष संयोग में आ रहा है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि में हुआ था, किंतु इस बार यह दोनों योग एक साथ नहीं बन रहे। रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह आरंभ होकर 18 अगस्त तक रहेगा। वहीं, जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 17 अगस्त को दोपहर 12:04 से 12:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से पूजन करने पर भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
भक्तों के लिए संदेश
कहा जाता है कि इस दिन उपवास रखकर, भक्ति गीत गाकर और श्रीकृष्ण के 108 नामों का जप करके जो भी भक्त प्रभु को प्रसन्न करता है, उसके जीवन से सभी क्लेश दूर हो जाते हैं। इस पावन अवसर पर पूरे विश्वास और आस्था के साथ भगवान का ध्यान करें, क्योंकि यही दिन है जब संसार के पालक श्रीकृष्ण का धरती पर अवतरण हुआ था।














