महिला खिलाड़ियों से उत्पीड़न के आरोपों में घिरे भरतपुर क्रिकेट संघ के सचिव, RCA ने बनाई 4 सदस्यीय जांच समिति, दोषी पाए जाने पर आजीवन प्रतिबंध की तैयारी

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की वार्षिक आमसभा (AGM) के दौरान इस बार एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला प्रमुखता से सामने आया। भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव शत्रुघ्न तिवारी पर महिला खिलाड़ियों के साथ कथित उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए आरसीए की एडहॉक कमेटी ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष समिति गठित करने का फैसला लिया है। साथ ही आमसभा में सर्वसम्मति से यह भी तय किया गया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पदाधिकारी पर क्रिकेट गतिविधियों से आजीवन प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस पूरे मामले ने क्रिकेट प्रशासन के साथ-साथ आरोपी के प्रभाव और रसूख को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पॉक्सो एक्ट से जुड़े पहलुओं की भी होगी जांच, 25 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

आरसीए एडहॉक कमेटी के संयोजक डॉ. मोहित यादव ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि महिला खिलाड़ियों की ओर से लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। उन्होंने कहा कि मामले में ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनके चलते पॉक्सो (POCSO) एक्ट के प्रावधान लागू होने की संभावना है। इसी वजह से फिलहाल जांच से जुड़े अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।

उन्होंने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसे 25 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच समिति पीड़ित पक्ष, गवाहों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। साथ ही आरोपी सचिव को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, ताकि निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच हो सके।

दोष सिद्ध होने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव

एजीएम के दौरान सभी सदस्यों ने इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा की और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि यदि जांच में भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन से आजीवन प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके अलावा आरसीए राज्य सरकार को पत्र लिखकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग करेगा।

डॉ. मोहित यादव ने प्रदेश की सभी महिला खिलाड़ियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी भी खिलाड़ी के साथ किसी स्तर पर उत्पीड़न या गलत व्यवहार हुआ है तो वे बिना किसी डर के आगे आएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से लेकर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तक आरसीए हर स्तर पर खिलाड़ियों के साथ खड़ा रहेगा।
एजीएम में लिए गए कई अहम फैसले

वार्षिक आमसभा में केवल इस मामले पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि राजस्थान क्रिकेट से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी निर्णय लिए गए। धौलपुर, सवाई माधोपुर और नागौर जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुए।

बैठक में लंबित जिला क्रिकेट संघ चुनावों को लेकर भी चर्चा हुई। डॉ. मोहित यादव ने कहा कि कई जिलों में आंतरिक विवादों के कारण फिलहाल चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया है, लेकिन उम्मीद है कि अगली एडहॉक कमेटी इन चुनावों को जल्द पूरा कराएगी।

इसके अलावा घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों के दैनिक भत्ते (DA) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। जयपुर और उदयपुर में लंबे समय से रुके आरसीए स्टेडियम निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने पर भी सहमति बनी। बैठक में वर्तमान लोकपाल को हटाकर नए लोकपाल की नियुक्ति के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। वहीं सर्वसम्मति से नागौर जिला क्रिकेट संघ की संबद्धता समाप्त (Disaffiliate) करने का निर्णय भी लिया गया।

शत्रुघ्न तिवारी ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

दूसरी ओर भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव शत्रुघ्न तिवारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी भी जांच से कोई आपत्ति नहीं है और वे पुलिस, एसओजी या देश की किसी भी जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि पहले उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उसके बाद निष्पक्ष जांच कराई जाए। शत्रुघ्न तिवारी ने आरोप लगाया कि एडहॉक कमेटी के संयोजक डॉ. मोहित यादव अपने समर्थकों को भरतपुर क्रिकेट संघ में बैकडोर एंट्री दिलाना चाहते हैं, इसलिए उनके खिलाफ यह पूरा घटनाक्रम रचा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में उनके खिलाफ एक भी आरोप साबित हो जाता है तो वे स्वयं जीवनभर के लिए क्रिकेट से दूरी बना लेंगे।

सोशल मीडिया पर भी उठने लगे कई सवाल

महिला खिलाड़ियों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक प्रभावी पुलिस या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं कुछ यूजर्स आरोपी के कथित राजनीतिक प्रभाव और रसूख की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही सरकार की महिला सुरक्षा व्यवस्था और खेल संस्थाओं में शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।