सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली सत्य और अहिंसा के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाया जाना उचित नहीं था। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और उसे बलपूर्वक रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने संदेश में राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक, लगातार बढ़ती शिक्षा लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाएं देश के भविष्य से जुड़े बेहद गंभीर विषय हैं, जिन पर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बल प्रयोग या प्रशासनिक कार्रवाई से छात्रों और उनके समर्थन में खड़े लोगों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल के मुताबिक, लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
अस्पताल ले जाने के लिए दिल्ली पुलिस ने बनाई विशेष योजनाइस बीच, सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष रणनीति अपनाई। अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई को बिना किसी टकराव के अंजाम देने के उद्देश्य से कई स्तरों पर तैयारी की गई थी। जंतर-मंतर इलाके में मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए गए, प्रदर्शन स्थल के मंच को सफेद चादरों से ढका गया और बड़ी संख्या में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह मिलने के बाद शुक्रवार रात से ही इस ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि रात करीब डेढ़ बजे वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश मिला कि सोनम वांगचुक की तत्काल चिकित्सकीय जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए। इसके बाद नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारी मंदिर मार्ग थाने में एकत्र हुए और पूरी कार्रवाई की विस्तृत रूपरेखा तैयार की।
मिली जानकारी अनुसार, पुलिस ने पहले से अभ्यास भी किया था ताकि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से बेहद कम समय में और बिना किसी अप्रिय स्थिति के सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जा सके। अधिकारियों का दावा है कि पूरी कार्रवाई मेडिकल सलाह और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालतराहुल गांधी ने शनिवार को एक अन्य पोस्ट के जरिए देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि छात्रों को तनावमुक्त, सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल मिल सके। उनका कहना था कि ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिसमें विद्यार्थियों को भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस न हो और माता-पिता का संघर्ष तथा त्याग सार्थक साबित हो।
राहुल गांधी ने इस दौरान देहरादून में आयोजित 'छात्रों की गूंज' रैली का एक वीडियो भी साझा किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा विवाद से जुड़ी छात्रा रिया कुमारी के पिता राजेश कुमार को मंच पर आमंत्रित किया। रिया ने कथित पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से उत्पन्न मानसिक तनाव के बीच मई महीने में आत्महत्या कर ली थी।
राहुल गांधी ने भावुक अंदाज में कहा कि रिया के पिता का दर्द केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन अनेक परिवारों की पीड़ा का प्रतीक है, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों की वजह से अपने बच्चों को खो दिया। उन्होंने कहा कि हर ऐसे छात्र के पीछे एक मां-बाप का सपना और पूरा परिवार होता है। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा व्यवस्था को नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुंचाती हैं। इसी कारण शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसे को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।