जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करीब 20 दिनों तक आंदोलनकारियों से किसी भी प्रकार का संवाद स्थापित करने की कोशिश नहीं की और अब जब मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है तो आंदोलन को जबरन समाप्त करने के लिए तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
आईएएनएस से बातचीत के दौरान टीकाराम जूली ने कहा कि इतने लंबे समय तक न तो केंद्र सरकार का कोई मंत्री, न भारतीय जनता पार्टी का कोई वरिष्ठ पदाधिकारी और न ही कोई जिम्मेदार सरकारी अधिकारी सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचा। उन्होंने कहा कि जब वांगचुक की सेहत को लेकर देश और विदेश में चिंता बढ़ने लगी तथा आम जनता का दबाव सरकार पर बढ़ा, तब प्रशासन ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कार्रवाई की। जूली ने आरोप लगाया कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं था, बल्कि सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि धरने में शामिल कई प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की गई, जिसकी उन्होंने कड़ी निंदा की।
दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार की नियुक्ति पर भी टीकाराम जूली ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां पहले से तय राजनीतिक सोच और रणनीति के तहत की जाती हैं। उनके अनुसार, सरकार विभिन्न स्वायत्त संस्थानों और महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति करना पसंद करती है, जो उसके निर्देशों के अनुरूप कार्य करें। जूली ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार संविधान की निष्पक्ष भावना के बजाय राजनीतिक निष्ठा को अधिक महत्व दे रही है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक स्थिति है।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में समान नागरिक संहिता को देशहित में आवश्यक मानती है, तो इसे पूरे भारत में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उनका आरोप था कि भाजपा केवल अपने शासन वाले राज्यों में इस कानून को लागू कर राजनीतिक संदेश देने और चुनावी लाभ लेने का प्रयास कर रही है। जूली ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को उसके धर्म, परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में इस व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ करना संविधान की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का वास्तविक उद्देश्य व्यापक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ अर्जित करना है।
गौशालाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर भी टीकाराम जूली ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पहले भी सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए फर्जी तरीके से गायों की संख्या बढ़ाकर दिखाने जैसे मामले सामने आ चुके हैं और उन पर जांच भी हुई थी। यदि अब फिर से इस प्रकार की शिकायतें मिल रही हैं, तो सरकार को पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश में गायों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी का सहारा ले रहे हैं। जूली ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित किए जाने की मांग भी की।