
11 सालों में पहली बार ऐसा होगा जब एक भी छात्र पिछली कक्षा में फेल हुए बिना राजस्थान बोर्ड का दसवीं का एग्जाम देगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद एक से आठवीं तक के छात्रों को फेल नहीं किया जा रहा है। वहीं पिछले साल कोरोना के चलते नवीं के छात्रों को प्रमोट करके दसवीं में प्रवेश दिया गया।
मार्च 2020 में लॉकडाउन से पहले ही दसवीं का कोर्स पूरा हो गया था। क्लास टेस्ट के साथ हाफ ईयरली और प्री बोर्ड भी हो गए थे। इन परीक्षाओं के परिणामों से छात्र अपनी तैयारियों का आंकलन कर पाए। 2021 में पढ़ाई ऑनलाइन हुई है। अब स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन 50 फीसदी छात्र ही आ रहे हैं। इनके नियमित टेस्ट का भी कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया है। इस साल हाफ ईयरली व प्री बोर्ड एग्जाम के बारे में निर्णय नहीं लिया गया।
करीब पांच प्रतिशत छात्र फेल होते हैं नवीं कक्षा में
शिक्षा विभाग के अनुसार हर साल नवीं कक्षा में करीब पांच से सात प्रतिशत छात्र फेल होते हैं। मतलब, उनका पढ़ाई का स्तर कमजोर होता है। उन्हें प्रमोट करके दसवीं कक्षा में पहुंचा दिया गया है। अब पढ़ाई में कमजोर छात्रों का स्तर बढ़ाकर उन्हें बोर्ड परीक्षाओं में पास करवाना भी शिक्षकों के सामने एक बड़ा चैलेंज रहेगा। पिछले साल 11.78 लाख छात्रों ने दसवीं की परीक्षा के लिए आवेदन किया था। इस साल 12.64 लाख स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है।














