
अमेरिकी वायुसेना का मानवरहित स्पेसक्राफ्ट एक्स-37बी पृथ्वी की कक्षा में 780 दिन परिक्रमा लगाने के बाद रविवार को लौट आया। अमेरिका करीब 10 साल से एक रहस्यमयी अभियान पर काम कर रहा है। इसके तहत भेजा गया यह सबसे लंबा मिशन था। यह स्पेसक्राफ्ट देखने में किसी छोटे स्पेसक्राफ्ट जैसा ही दिखता है। इसे कक्षा में प्रयोगों के लिए उपयोग किया जाता है, जिसे परीक्षणों के लिए धरती पर वापस लाया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना इस स्पेसक्राफ्ट का प्रयोग पृथ्वी के बाहरी कक्षा में किसी स्पेशल मिशन को अंजाम देने में करती है। बताया जा रहा है कि सैन्य प्रयोगों के इतिहास में इतने लंबे समय तक कोई टेस्ट नहीं हुआ है।
वायुसेना ने इन प्रयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है। सिर्फ यह बताया कि इस तरह के कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरिक्ष में चुनौतियों को कम करना और अंतरिक्ष यान तकनीक को दोबारा इस्तेमाल होने लायक बनाना है।

वायुसेना ने कहा- एक्स-37बी मिशन ने वायुसेना अनुसंधान प्रयोगशाला (एएफआरएल) के लिए कई प्रयोग किए। एएफआरएल अंतरिक्ष, वायु और साइबरस्पेस सेक्टरों के लिए वॉरफाइटिंग टेक्नोलॉजी विकसित करता है। इसकी वेबसाइट के अनुसार- यह लेजर हथियार विकसित कर रहा है, जिसे विमान पर लगाया जा सकता है।
विमान एक्स-37बी को नए नेविगेशन सिस्टम का परीक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही वायुमंडल में विमान के प्रवेश और सुरक्षित लैंडिंग के लिए बनाया गया है। वायुसेना के अनुसार, पिछले मिशनों ने नेविगेशन, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, ऑटोनोमस ऑर्बिटल फ्लाइट जैसी तकनीक का परीक्षण किया है। एक्स-37बी स्पेसक्राफ्ट करीब 29 फीट लंबा और 9।5 फीट चौड़ा है। इसके पंख करीब 15 फीट लंबे हैं। इसे स्पेसएक्स फॉल्कन-9 रॉकेट से सितंबर 2017 में लॉन्च किया गया था। वायुसेना ने कहा है कि वह 2020 में छठा एक्स-37बी मिशन शुरू करने की तैयारी कर रहा है।














