इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से COVID-19 के लिए बनाई गई नेशनल टास्क फोर्स ने सुझाव दिया है कि भारत में कोरोना वायरस के हाई-रिस्क वाले मामलों में इलाज के लिए Hydroxychloroquine इस्तेमाल की जा सकती है। यह दवा मुख्य रूप से मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होती है।
एडवायजरी के मुताबिक, ये दवा उन हेल्थकेयर वर्कर्स को दी जा सकती है जो संदिग्ध या कन्फर्म COVID-19 मामलों की सेवा में लगे हैं। इसके अलावा लैब में कन्फर्म मामलों के घरवालों को भी यह दवा देने की सुझाव दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसी दवा का नाम सुझाया था।
रिसर्च में चला पता, असरदार है ये दवा
बता दे, कोरोना वायरस का एंटीडोट अब तक नहीं खोजा जा सका है ऐसे में विभिन्न रिसर्च, रिपोर्ट्स में Hydroxychloroquine सल्फेट को कोरोना के इलाज में मददगार पाया गया है। अमेरिका में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) यह दवा इम्पोर्ट कर रहा है। चीन के हेल्थ डिपार्टमेंट ने भी फरवरी में कहा था कि क्लोरोक्वीन फॉस्फेट के इस्तेमाल से अच्छे नतीजे मिले हैं।














