
देश में प्याज के दाम बीते 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुके है। कम सप्लाई और डिमांड में तेजी के चलते कीमतों में उछाल आया है। हालाकि, सरकार प्याज की बढ़ती कीमत को रोकने के लिए जरुरी कदम उठा रही है लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में प्याज के दाम बढ़ने का कारण किसानों के पास प्याज का स्टाक खत्म होना है। अगर नया प्याज बाजार में नहीं आया तो दाम 70 से 90 रुपए किलों तक भी पहुंच सकते हैं। बता दे, देश के सबसे बड़े होलसेल प्याज मार्केट (Onion Market) 'लासलगांव एपीएमसी' (Lasalgaon APMC) में बीते गुरुवार को प्याज के भाव में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक का इजाफा हुआ। गुरुवार शाम को इस बाजार में प्याज का भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल के पार जा चुका है। आपको बता दें कि इसके पहले इस बाजार में प्याज का उच्चतम भाव 5,700 रुपये प्रति क्विंटल था, जोकि 22 अगस्त को 2015 को दर्ज किया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में प्याज की आवक में कमी आई है। इन्हीं राज्यों में प्याज की सबसे अधिक उत्पादन होता है। यही वजह है कि प्याज के मांग बढ़ने की वजह से कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। खरीफ फसल अभी भी पके नहीं है और इसकी कटाई में अभी कुछ समय लगेगा।

1 हफ्ते में 15 रुपये प्रतिकिलो की हुई बढ़त
लासलगांव में बीते एक सप्ताह से प्याज की कीमतों में बढ़त दर्ज की जा रही है। बताते चलें कि देशभर के कई प्रमुख मंडियों में लासलगावं के ही प्याज सप्लाई किये जाते हैं। पिछले सप्ताह इस बाजार में प्याज का जो भाव 35 रुपये प्रति किलोग्राम था वो बढ़कर 50 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। लासलगांव में गुरुवार को प्याज की कीमतों में इस बढ़ोतरी को असर अलगे दो तीन दिनों में बाजार में दिखने लगेगा। पिछले माह लासलगांव में 15 हजार क्विंटल प्याज हर रोज आता था। अब यह घटकर 10-12 हजार क्विंटल प्रति दिन हो गया है। गुरुवार को इस बाजार में 7 हजार क्विंटल ही प्याज की आवक रही। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में स्थिति सुधर सकती है।














