न्यूज़
Yogi Adityanath Jyotish Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

भारत की स्वतंत्रता के महानायक थे नेताजी, जानें उनकी जीवनी के अहम हिस्से

उनके जन्मदिन के ख़ास मौके पर हम आपको उनकी जीवनी के कुछ अहम हिस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Mon, 21 Jan 2019 3:32:40

भारत की स्वतंत्रता के महानायक थे नेताजी, जानें उनकी जीवनी के अहम हिस्से

भारत को आजादी दिलाने में कई क्रांतिकारियों का योगदान रहा हैं। सभी ने अपनी सोच और प्रयासों की मदद से देश को आजादी दिलाने में सहयोग किया हैं। ऐसे में ही एक थे 'नेताजी सुभाष चन्द्र बोस' जिन्होनें यूरोप में भारत की स्वतंत्रता की अलख जगाई और "आजाद हिन्द फ़ौज" का गठन कर महानायक के तौर पर उभरे। आज उनके जन्मदिन के ख़ास मौके पर हम आपको उनकी जीवनी के कुछ अहम हिस्सों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये जानते है इस महानायक की जीवनी के बारे में।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम 'जानकीनाथ बोस' और माँ का नाम 'प्रभावती' था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था।

नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इण्डियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया। अँग्रेज़ी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।

neta ji,subhash chandra bose,indian independence in europe

1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र भारत लौट आए। सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे। वास्तव में महात्मा गांधी उदार दल का नेतृत्व करते थे, वहीं सुभाष चंद्र बोस जोशीले क्रांतिकारी दल के प्रिय थे। महात्मा गाँधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि महात्मा गाँधी और उनका मक़सद एक है, यानी देश की आज़ादी। सबसे पहले गाँधीजी को राष्ट्रपिता कह कर नेताजी ने ही संबोधित किया था।
1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। यह नीति गाँधीवादी आर्थिक विचारों के अनुकूल नहीं थी। 1939 में बोस पुन एक गाँधीवादी प्रतिद्वंदी को हराकर विजयी हुए। गांधी ने इसे अपनी हार के रुप में लिया। उनके अध्यक्ष चुने जाने पर गांधी जी ने कहा कि बोस की जीत मेरी हार है और ऐसा लगने लगा कि वह कांग्रेस वर्किंग कमिटी से त्यागपत्र दे देंगे। गाँधी जी के विरोध के चलते इस 'विद्रोही अध्यक्ष' ने त्यागपत्र देने की आवश्यकता महसूस की। गांधी के लगातार विरोध को देखते हुए उन्होंने स्वयं कांग्रेस छोड़ दी।

इस बीच दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया। बोस का मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों से मिलकर आज़ादी हासिल की जा सकती है। उनके विचारों के देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में नज़रबंद कर लिया लेकिन वह अपने भतीजे शिशिर कुमार बोस की सहायता से वहां से भाग निकले। वह अफगानिस्तान और सोवियत संघ होते हुए जर्मनी जा पहुंचे।

neta ji,subhash chandra bose,indian independence in europe

सक्रिय राजनीति में आने से पहले नेताजी ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। वह 1933 से 36 तक यूरोप में रहे। यूरोप में यह दौर था हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद का। नाजीवाद और फासीवाद का निशाना इंग्लैंड था, जिसने पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पर एकतरफा समझौते थोपे थे। वे उसका बदला इंग्लैंड से लेना चाहते थे। भारत पर भी अँग्रेज़ों का कब्जा था और इंग्लैंड के खिलाफ लड़ाई में नेताजी को हिटलर और मुसोलिनी में भविष्य का मित्र दिखाई पड़ रहा था। दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। उनका मानना था कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक और सैन्य सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।

सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की। उन दोनों की एक अनीता नाम की एक बेटी भी हुई जो वर्तमान में जर्मनी में सपरिवार रहती हैं। नेताजी हिटलर से मिले। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए। उन्होंने 1943 में जर्मनी छोड़ दिया। वहां से वह जापान पहुंचे। जापान से वह सिंगापुर पहुंचे। जहां उन्होंने कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान अपने हाथों में ले ली। उस वक्त रास बिहारी बोस आज़ाद हिंद फ़ौज के नेता थे। उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज का पुनर्गठन किया। महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट का भी गठन किया जिसकी लक्ष्मी सहगल कैप्टन बनी।

'नेताजी' के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" दिया।

18 अगस्त 1945 को टोक्यो (जापान) जाते समय ताइवान के पास नेताजी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ बताया जाता है, लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। नेताजी की मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।

राज्य
View More

Shorts see more

कुदरती तरीके से चाहिए चमकदार और सफेद दांत, इन 5 चीजों को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करें

कुदरती तरीके से चाहिए चमकदार और सफेद दांत, इन 5 चीजों को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करें

  • खराब खानपान से दांत पीले हो जाते हैं
  • महंगे ट्रीटमेंट के बिना दांतों को चमकदार बनाएं
  • घरेलू नुस्खों से दांत सफेद और मजबूत बनते हैं
read more

ताजा खबरें
View More

ओडिशा: कटक के SCB मेडिकल कॉलेज के ICU में भीषण आग, 10 मरीजों की मौत, 5 की हालत गंभीर
ओडिशा: कटक के SCB मेडिकल कॉलेज के ICU में भीषण आग, 10 मरीजों की मौत, 5 की हालत गंभीर
रेल यात्रियों के लिए अलर्ट,17 से 22 मार्च के बीच इस रूट पर कई ट्रेनों का संचालन रहेगा बंद
रेल यात्रियों के लिए अलर्ट,17 से 22 मार्च के बीच इस रूट पर कई ट्रेनों का संचालन रहेगा बंद
दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी भीषण आग; कई उड़ानें रद्द
दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, फ्यूल टैंक में लगी भीषण आग; कई उड़ानें रद्द
क्या है OMAD डाइट? जिसे अपनाकर करण जौहर ने घटाया 20 किलो वजन, जानें मोटापा कम करने में कैसे करती है काम
क्या है OMAD डाइट? जिसे अपनाकर करण जौहर ने घटाया 20 किलो वजन, जानें मोटापा कम करने में कैसे करती है काम
पिथौरागढ़ में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार; सेना के जवान समेत 3 लोगों की मौत
पिथौरागढ़ में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार; सेना के जवान समेत 3 लोगों की मौत
तेजस्वी यादव का बड़ा फैसला, केरल में LDF के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी RJD
तेजस्वी यादव का बड़ा फैसला, केरल में LDF के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी RJD
बॉक्स ऑफिस पर ‘द केरल स्टोरी 2’ का जलवा बरकरार, तीसरे संडे भी शानदार कमाई; 17 दिन का हिसाब जानें
बॉक्स ऑफिस पर ‘द केरल स्टोरी 2’ का जलवा बरकरार, तीसरे संडे भी शानदार कमाई; 17 दिन का हिसाब जानें
सूर्य, शनि और शुक्र की युति लाई शुभ संयोग, इन 3 राशियों की बढ़ेगी आमदनी
सूर्य, शनि और शुक्र की युति लाई शुभ संयोग, इन 3 राशियों की बढ़ेगी आमदनी
Advance Booking में छाई रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’, ‘पठान’ और ‘RRR’ को छोड़ा पीछे; रिलीज से पहले ही ठोकी सेंचु
Advance Booking में छाई रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’, ‘पठान’ और ‘RRR’ को छोड़ा पीछे; रिलीज से पहले ही ठोकी सेंचु
Google का ‘Zero Day’ अलर्ट: 3.5 अरब यूजर्स पर साइबर अटैक का खतरा, तुरंत करें Chrome अपडेट
Google का ‘Zero Day’ अलर्ट: 3.5 अरब यूजर्स पर साइबर अटैक का खतरा, तुरंत करें Chrome अपडेट
मुल्तानी मिट्टी पाउडर या पत्थर, ग्लोइंग स्किन के लिए कौन सा है बेहतर?
मुल्तानी मिट्टी पाउडर या पत्थर, ग्लोइंग स्किन के लिए कौन सा है बेहतर?
चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए पपीता कैसे करें इस्तेमाल, नैचुरल फेस पैक बनाने का आसान तरीका
चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए पपीता कैसे करें इस्तेमाल, नैचुरल फेस पैक बनाने का आसान तरीका
मीठे पानी वाला नारियल कैसे पहचानें? रंग और कुछ आसान टिप्स से खरीदते वक्त करें सही चुनाव
मीठे पानी वाला नारियल कैसे पहचानें? रंग और कुछ आसान टिप्स से खरीदते वक्त करें सही चुनाव
बिना चीनी के बनाएं स्वादिष्ट मलाईदार लस्सी, हेल्दी ड्रिंक की आसान रेसिपी
बिना चीनी के बनाएं स्वादिष्ट मलाईदार लस्सी, हेल्दी ड्रिंक की आसान रेसिपी