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  • 49 साल : 200 से ज्यादा फिल्में, 3 राष्ट्रीय, 12 फिल्मफेयर के साथ अन्य अनगिनत पुरस्कार

49 साल : 200 से ज्यादा फिल्में, 3 राष्ट्रीय, 12 फिल्मफेयर के साथ अन्य अनगिनत पुरस्कार

By: Pinki Sun, 18 Feb 2018 3:18 PM

49 साल : 200 से ज्यादा फिल्में, 3 राष्ट्रीय, 12 फिल्मफेयर के साथ अन्य अनगिनत पुरस्कार

गत 15 फरवरी को हिन्दी सिनेमा में मिथक बन चुके अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने करियर के 49 वर्ष पूरे कर लिए। आधी शताब्दी से दर्शकों का मनोरंजन करते आ रहे इस अभिनेता ने जिन्दगी में बहुत से उतार चढ़ाव देखे। कभी शिखर सितारा रहे इस अभिनेता के सामने एक वक्त ऐसा भी आया जब काम के लिए इन्हें नवोदित अभिनेताओं की तरह निर्माताओं के चक्कर लगाने पड़े। विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए स्वयं को ‘हीरो’ साबित करने में सफल रहा यह अभिनेता आज 77 वर्ष की आयु में भी पूरी तरह से सक्रिय है। हाल ही में उन्हें लेकर ‘गुमनाम’ नामक फिल्म की तैयारी की जा रही है, लेकिन इनकी दिनांक डायरी पूरी तरह से भरी होने के कारण उसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। यह है अमिताभ बच्चन जो आज पूरी तरह से न सिर्फ सक्रिय हैं अपितु सफलता के पर्याय बन गए हैं।

49 साल के सफर में 3 बार राष्ट्रीय पुरस्कार और 12 बार फिल्म फेयर पुरस्कार जीतने वाले इस अभिनेता ने अपनी जवानी के दिनों में हिन्दी सिनेमा की दशा और दिशा ही बदल दी थी। वर्ष 1973 से लेकर 1984 तक उन्होंने ‘एंग्रीयंग मैन’ की जो जड़ बोयी आज वह विशाल बरगद का रूप धारण कर चुकी है। उनकी इस छवि को उनके बाद आने वाले कई नायकों ने भुनाया और नाम कमाया, लेकिन वो प्रभाव पैदा नहीं कर पाये जो अमिताभ बच्चन ने किया।

यह सही है कि अमिताभ बच्चन ने डेढ़ दशक लम्बा सफलतम करियर जीया लेकिन बात उनके अभिनय की, की जाए तो शिखर दिनों में उनका अभिनय वैसा नहीं था जैसा वे आज करते हैं। उस दौर मेंं अमिताभ बच्चन को सफलता उनके अभिनय से नहीं अपितु उनके ‘मैनेरिज्म’ से मिली। उस दौर की फिल्मों को गौर से देखा जाए तो उसमें उनका सपाट धीर गम्भीर चेहरा, नश्तर की तरह अंदर तक चुभती आवाज सुनाई देती है।

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अमिताभ अपने दौर के पहले ऐसे अभिनेता रहे जिनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ से ज्यादा का कारोबार करने में सफलता प्राप्त की थी। तब फिल्में सिनेमाघरों में सिल्वर, गोल्डन और प्लेटिनियम जुबली मनाया करती थी। दर्शक बार-बार फिल्म देखने जाता था और आनन्दित होता था।

अभिनय किसे कहा जाता है इसकी शुरूआत अमिताभ बच्चन ने निर्माता निर्देशक आदित्य चोपड़ा की फिल्म ‘मोहब्बतें’ से शुरू किया। यह वह फिल्म थी जिसमें उन्होंने अपनी उम्र के अनुरूप भूमिका अभिनीत की। फिल्म सफल रही और इसके साथ ही दर्शकों को परदे पर देखने को मिला अभिनय का वो सागर जिसे वे देखने से वंचित रह गए थे। ‘मोहब्बतें’ में उनकी भूमिका पूर्व के एंगी यंगमैन वाली छवि (जंजीर, दीवार, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिंकदर) के युवा व्यक्ति से मिलती जुलती थी। ‘मोहब्बतें’ के बाद उनकी ‘एक रिश्ता: द बॉण्ड ऑफ लव’, ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘बागबान’ ऐसी फिल्में रही हैं जिनमें उन्होंने उम्र दराज युवक की भूमिका को जीया। आज भी जब कभी ‘बागवान’ देखने का मौका मिलता है तो अमिताभ का अभिनय देख जहाँ हैरानी होती है, वहीं क्लाइमैक्स में बोले गए संवाद मन को अंदर तक भिगो जाते हैं। इस फिल्म को प्रदर्शित हुए 14 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है लेकिन देखते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे कल की बात हो।

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इन फिल्मों के बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्में दी, जिनमें उनके अभिनय के नए आयाम देखने को मिले। इन्हीं फिल्मों की भीड़ में आई थी संजय लीला भंसाली निर्मित निर्देशित ‘ब्लैक’। ‘ब्लैक’ में जिस किरदार को अमिताभ ने जीया उसे कोई अन्य अभिनेता परदे पर नहीं उतार सकता था। अभी ‘ब्लैक’ का जादू उतरा भी न था कि उसी वर्ष अर्थात् 2005 में उन्होंने ‘सरकार’ के जरिये दर्शकों को अपने अभिनय का एक और ‘अक्स’ दिखाया। ‘सरकार’ अमिताभ के करियर में मील का पत्थर है। यह वो किरदार है जिसे अमिताभ ने सिर्फ और सिर्फ अपने चेहरे पर आए भावों से अभिव्यक्त किया है। कम संवाद, लेकिन असरदार, ब्लेड की धार से ज्यादा खतरनाक आवाज उनके किरदार की गहराई को व्यक्त करती है।

अमिताभ बच्चन ने अपने सफल पुनरुत्थान का भरपूर दोहन करना शुरू किया। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने विज्ञापन जगत में भी स्वयं को सिरमौर साबित किया। वो ऐसा वक्त था जब हर छोटे-बड़े विज्ञापन में अमिताभ बच्चन नजर आते थे। फिर चाहे वह कैडबरी का कुछ मीठा हो जाय हो या बस दो मिनट का मैगी हो, सब जगह अमिताभ ही अमिताभ नजर आने लगे। इसका विपरीत असर उनकी आगामी फिल्मों पर पड़ा जब बॉक्स ऑफिस पर बाबुल, नि:शब्द, एकलव्य जैसी फिल्मों को असफलता मिली।

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रामगोपाल वर्मा के बाद निर्देशक आर बाल्की ऐसे व्यक्ति रहे हैं, जिन्होंने अमिताभ की अभिनय क्षमता का पूरी तरह से दोहन किया। अपने करियर की पहली निर्देशित फिल्म ‘चीनी कम’ में उन्होंने अमिताभ और तब्बू की बेमेल जोड़ी दर्शकों के सामने प्रस्तुत की। ‘चीनी कम’ दो बेहतरीन अदाकारों का बेजोड़ मिश्रण साबित हुई। इस फिल्म में अमिताभ के अभिनय का नया रंग देखने को मिला।

अमिताभ का सफर बदस्तूर जारी है। फिल्म चले न चले अमिताभ का अभिनय अब नए-नए पहलू दर्शाता नजर आता है। गत वर्षों में उनकी प्रदर्शित फिल्मों ‘पीकू’, ‘पिंक’ ने उनके अभिनय को और निखारा है। इन दिनों बॉलीवुड की कमोबेश सभी बड़ी फिल्मों में नजर आने वाले अमिताभ बच्चन आमिर खान, रणबीर कपूर, ऋतिक रोशन, अक्षय खन्ना के साथ काम कर रहे हैं। सलमान, आमिर, शाहरुख, अजय देवगन, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन के साथ काम कर चुके अमिताभ इस पीढ़ी के बाद आए सितारों के साथ भी सहजता के साथ काम कर रहे हैं।

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बड़े परदे के साथ-साथ वे छोटे परदे पर भी सक्रिय हैं। वर्ष 2000 से शुरू हुआ उनका पहला टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का दसवाँ सीजन इस वर्ष प्रसारित होने की तैयारी में है। दर्शकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें अमिताभ के अभिनय का नया रंग रूप देखने को मिल सकता है। फिल्म पटकथाकार अमिताभ को केन्द्र में रखकर फिल्मों की पटकथायें तैयार कर रहे हैं। आर. बाल्की अपनी अगली फिल्म में उन्हें एक बार फिर से नायक के तौर पर पेश करने जा रहे हैं।

हिन्दी सिनेमा बदल गया है, अब दर्शक विषय आधारित फिल्मों में उम्र दराज अभिनेता अभिनेत्रियों को देखना पसन्द कर रहा है, जो आने वाले समय के लिए शुभ संकेत है।

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