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चंद्र ग्रहण को लेकर मन में उठ रहे होंगे कई सवाल, जवाब पाने के लिए क्लिक करें

भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण (Grahan) 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगा।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Tue, 16 July 2019 11:41:11

चंद्र ग्रहण को लेकर मन में उठ रहे होंगे कई सवाल, जवाब पाने के लिए क्लिक करें

आज रात आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) लगेगा जिसे पूरे देश में देखा जा सकेगा। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण (Grahan) 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगा। लेकिन इससे पहले सूतक लगेगा। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। सूतक की अवधि 16 जुलाई दोपहर 4 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 17 जुलाई सुबह 4:40 मिनट तक है। बता दे, आंशिक चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) तब होता है जब सूरज और चांद के बीच पृथ्‍वी घूमते हुए आती है, लेकिन वे तीनों एक सीधी लाइन में नहीं होते। ऐसी स्थिति में चांद की छोटी सी सतह पर पृथ्‍वी के बीच के हिस्‍से की छाया पड़ती है, जिसे अंब्र (Umbra) कहते हैं। चांद के बाकी हिस्‍से में पृथ्‍वी के बाहरी हिस्‍से की छाया पड़ती है, जिसे पिनम्‍ब्र (Penumbra) कहते हैं। इस दौरान चांद के एक बड़े हिस्‍से में हमें पृथ्‍वी की छाया नजर आने लगती है। चंद्र ग्रहण के दिन ही गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) भी है। यह चंद्र ग्रहण कई मायनों में खास रहने वाला है। इस बार चंद्र ग्रहण पर वही दुर्लभ योग बन रहे हैं जो 149 साल पहले 12 जुलाई, 1870 को 149 साल पहले गुरु पूर्णिमा पर बने थे। यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में स्पर्श करके उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण में समाप्त होगा। आपको बता दें कि 16 जुलाई को लगने वाले आंशिक चंद्र ग्रहण बाद फिर 2019 का आखिरी ग्रहण और तीसरा सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 26 दिसंबर को होगा, जिसे भारत में देखा जा सकेगा। 26 दिसंबर को वलयकार (Annular Solar Eclipse) सूर्य ग्रहण होगा।

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यहां पर हम आपको इस आंशिक चंद्र ग्रहण से जुड़े जरूरी बताने जा रहे है...

यह कैसा चंद्र ग्रहण है?

हिंदू धर्म के पंडितों और विद्वानों के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल की गुरु पूर्णिमा पर 16 जुलाई को चंदग्रहण 1:32 मिनट पर शुरु होकर अलगे दिन सुबह 4:30 तक रहेगा। ग्रहण काल 2 घंटे 58 मिनट का होगा। हिंदू धर्म में सूतक काल में सारे शुभ कामों की मनाही है। यही वजह है कि इस दौरान चारों धाम के कपाट बंद रहेंगे। इस दौरान भगवान की आराधना करना भी शुभ नहीं माना जाता है। सूतक खत्म होने पर चारों धामों और मंदिरों के पुजारी पवित्र गंगाजल से मंदिर का पवित्रीकरण करेंगे इसके बाद ही मंदिर में पूजा पाठ शुरू होगा और मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे।

ग्रहण का सूतक काल कब लगेगा?


शास्‍त्रों के नियम के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से नौ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। तो इस हिसाब से सूतक 16 जुलाई को शाम 4 बजकर 31 मिनट से ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में सूतक काल शुरू होने से पहले गुरु पूर्णिमा की पूजा विधिवत् कर लें। सूतक काल के दौरान पूजा नहीं की जाती है। सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट भी बंद हो जाएंगे।

ग्रहण काल आरंभ: 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट

ग्रहण काल का मध्‍य: 17 जुलाई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट

ग्रहण का मोक्ष यानी कि समापन: 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट

किन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण?

दुनिया भर में यह ग्रहण एशिया, यूरोप, ऑस्‍ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के अधिकतर हिस्‍सों में दिखाई देगा। इसके साथ-साथं यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। लेकिन देश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित बिहार, असम, बंगाल और उड़ीस में ग्रहण की अवधि में ही चंद्र अस्‍त हो जाएगा।

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किस समय दिखेगा आंशिक चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण कुल 2 घंटे 59 मिनट का होगा। भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगा। इस दिन चंद्रमा पूरे देश में शाम 6 बजे से 7 बजकर 45 मिनट तक उदित हो जाएगा इसलिए देश भर में इसे देखा जा सकेगा।

इस ग्रहण को कैसे देख सकते हैं?

चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं होती है। चंद्र ग्रहण पूरी तरह से सुरक्षित होता है इसलिए आप इसे नंगी आंखों से देख सकते हैं। अगर आप टेलिस्‍कोप की मदद से चंद्र ग्रहण देखेंगे तो आपको बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई देगा।

ग्रहण के दुष्‍प्रभाव से बचने के लिए क्‍या उपाय करें?

वैसे तो ग्रहण के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं, लेकिन धार्मिक मान्‍यताओं में ग्रहण का विशेष महत्‍व है। ग्रहण काल को अशुभ माना गया है। सूतक की वजह से इस दौरान कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्‍यताओं में विश्‍वास रखने वाले लोग ग्रहण के वक्‍त शिव चालिसा का पाठ कर सकते हैं। साथ ही ग्रहण खत्‍म होने के बाद नहाकर गंगा जल से घर का शुद्धिकरण किया जाता है। फिर पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा देने का विधान है।

कई लोग ग्रहण को सिर्फ बुरे परिप्रेक्ष में देखते हैं जबकि सही उपाय किए जाएं तो आपको ग्रहण में कई फायदे भी हो सकते हैं।

- यदि घर में कोई लंबे समय से बीमारी है तो ग्रहण के बाद घी और खीर से हवन आदि करने से भी लाभ होता है। चंद्रमा कमजोर स्थिति में है तो ऊं चंद्राय नम: मंत्र का जाप करने से लाभ मिलेगा।

- ग्रहण के दौरान प्राणायाम और व्यायाम करना चाहिए, सोच को सकारात्मक रखना चाहिए। चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।

- स्नान के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं और उनकी पूजा करें। जरूरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मणों को अन्न का दान करना चाहिए।

यह भी पढ़े : इन राशियों पर पड़ेगा चंद्रग्रहण का असर, राशिनुसार करें ये उपाय मिलेगा फायदा

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चंद्र ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के बाद जब अमृत बाहर आया तो इसे लेकर देवताओं और असुरों में विवाद हो गया। असुर चाहते थे कि पूरा अमृत उन्हें मिल जाए जबकि देवता इसके खिलाफ थे। वैसे भी समुंद्र मंथन देव और असुर दोनों ने मिलकर किया था, ऐसे में देवता अपना पूरा हक अमृत पर नहीं जता सकते थे। साथ ही ये भी परेशानी थी कि असुरों को अगर अमृत का कुछ हिस्सा भी मिल गया तो वे अमर हो जाएंगे और फिर पुरी दुनिया को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

अमृत को लेकर जब विवाद गहराया तो भगवान विष्णु ने एक अपनी चतुराई से एक तरीका निकाला। भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और असुरों को अपने मोहजाल में फांसकर देवताओं से अलग बैठाया। इसके बाद वह खुद एक-एक कर हर किसी को अमृतपान कराने लगीं।

दरअसल, मोहिनी रूप में भगवान विष्णु देवताओं को तो अमृत का पान करा रहे थे लेकिन असुरों को उन्होंने अपनी माया से कोई और पेय पदार्थ पिलाना शुरू कर दिया। स्वभार्नु नाम का असुर ये बात समझ गया और वह रूप बदलकर देवताओं की पंक्ति में जा बैठा। मोहिनी अभी उले अमृत पिला ही रही थीं कि सूर्य और चंद्र देव ने उसे पहचान लिया। यह देख भगवान विष्णु ने वापस अपने रूप में आ गये और स्वभार्नु का सिर अपने सुदर्शन चक्र से उसके धड़ से अलग कर दिया। चूकी स्वभार्नु कुछ अमृत पी चुका था इसलिए उसकी मृत्यु नहीं हो सकी।

कथा के अनुसार उसके सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु के नाम से जाना गया। चूकी सूर्य और चंद्र ने राहु को अमृत पीते हुए पहचाना था, इसलिए वह दोनों को अपना दुश्मन मानता है और ग्रहण के समय उन्हें ग्रस लेता है। इस वजह से हर बार चंद्र और सूर्य ग्रहण लगते हैं।

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