
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान अब 7 अगस्त से प्रभाव में आएगा। यह फैसला पहले 1 अगस्त से लागू किया जाना था, लेकिन इसे कुछ प्रशासनिक कारणों से आगे बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय अमेरिका के व्यापारिक एजेंडे का एक बड़ा हिस्सा है और इसका असर भारत-अमेरिका के बीच चल रहे 130 अरब डॉलर के व्यापार पर साफ तौर पर देखा जाएगा।
भारत हर साल अमेरिका को लगभग 87 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद और सेवाएं निर्यात करता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए आयात शुल्क के कारण अब भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे और अमेरिकी ग्राहक वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लग सकता है।
किन क्षेत्रों पर होगा टैरिफ का सबसे अधिक प्रभाव?
1. इलेक्ट्रॉनिक्स
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अमेरिका को सबसे ज्यादा निर्यात करता है, खासकर मोबाइल फोन, लैपटॉप और सर्वर जैसे उत्पाद। यह सेक्टर सबसे पहले टैरिफ की चपेट में आएगा। हालांकि, प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सेक्टर पर शुल्क लागू करने के लिए अमेरिका को अभी 'सेक्शन 232' की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे दो सप्ताह की अस्थायी राहत मिल सकती है।
2. टेक्सटाइल
कपड़ा उद्योग भारत के कुल टेक्सटाइल निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को भेजता है। नए टैरिफ के कारण इस क्षेत्र को कड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों पर फिलहाल भारत की तुलना में कम या समान टैरिफ लागू हैं।
3. फार्मा
अमेरिका भारत के फार्मास्युटिकल उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है, जहां भारत हर साल लगभग 10.5 अरब डॉलर मूल्य की दवाइयां भेजता है। हालाँकि, ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इस सेक्टर को 25% टैरिफ से बाहर रखा है, लेकिन भविष्य में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
4. रत्न और आभूषण
भारत के रत्न-आभूषण उद्योग को नए टैरिफ से सीधा असर पड़ सकता है। पहले जहां पॉलिश्ड हीरों पर शून्य और अन्य ज्वैलरी पर 5–13.5 प्रतिशत तक टैक्स था, अब इसमें वृद्धि के संकेत हैं, जिससे निर्यात और घरेलू उद्योग पर असर पड़ सकता है।
5. कृषि उत्पाद
भारत अमेरिका को लगभग 5.6 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जिनमें मछली, मसाले, चावल और हर्बल उत्पाद शामिल हैं। मरीन प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ने की संभावना सबसे अधिक है, जिससे सीफूड इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हो सकता है।
रूस से व्यापार पर ट्रंप की चेतावनी और संभावित असर
ऊर्जा क्षेत्र
भारत रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दर पर तेल खरीदता रहा है, जो उसकी कुल तेल जरूरत का 35% हिस्सा है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि रूस से व्यापार करने पर अतिरिक्त 'पेनाल्टी' लगाई जा सकती है, जिससे भारत की ऊर्जा रणनीति प्रभावित हो सकती है।
रक्षा और हथियार क्षेत्र
भारत की सेना अब भी रूस के हथियारों पर काफी हद तक निर्भर है। बीते दो दशकों में भारत ने रूस से करीब 40 अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं। अगर अमेरिका इस क्षेत्र में पेनाल्टी लगाता है, तो भारत की रणनीतिक खरीद योजनाएं बाधित हो सकती हैं।














