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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा शुल्क? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान के संकेतों ने बढ़ाई हलचल

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर संभावित शुल्क को लेकर ओमान के संकेतों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। जानिए ईरान-अमेरिका तनाव, समुद्री व्यापार और ओमान के रुख पर पूरी जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 27 Jun 2026 10:48:06

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा शुल्क? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान के संकेतों ने बढ़ाई हलचल

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। ओमान ने यूरोपीय अधिकारियों के साथ बातचीत में संकेत दिया है कि इस समुद्री मार्ग का संचालन अब पहले जैसी व्यवस्था के तहत नहीं चल सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भविष्य में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कुछ सेवाओं के बदले शुल्क वसूला जा सकता है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह शुल्क सभी जहाजों के लिए अनिवार्य होगा या वैकल्पिक रहेगा।

ओमानी अधिकारियों का कहना है कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पूरी तरह सम्मान करता रहेगा और उसी के अनुरूप कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण, समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बदले जहाजों से फीस ली जा सकती है। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इन सेवाओं का उपयोग करने वाले सभी जहाजों को भुगतान करना अनिवार्य होगा या नहीं।

अन्य समुद्री मार्गों के मॉडल का भी कर रहा है अध्ययन

रिपोर्ट के अनुसार, ओमान केवल होर्मुज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य प्रमुख समुद्री मार्गों के संचालन के तरीकों का भी अध्ययन कर रहा है। इसमें एशिया का रणनीतिक मलक्का जलडमरूमध्य भी शामिल है, जहां वर्तमान में जहाजों से किसी प्रकार की अनिवार्य ट्रांजिट फीस नहीं ली जाती। ओमान इन मॉडलों का अध्ययन कर भविष्य की नीति तय करने की दिशा में काम कर रहा है।

अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों की बढ़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं ने अमेरिका, यूरोपीय देशों और खाड़ी क्षेत्र के अरब राष्ट्रों की चिंता बढ़ा दी है। इन देशों को आशंका है कि यदि इस समुद्री मार्ग पर अतिरिक्त शुल्क या नई शर्तें लागू होती हैं, तो वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

मैक्रों और ओमान के सुल्तान की मुलाकात में होगा अहम विमर्श

इस पूरे मुद्दे पर सोमवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के बीच होने वाली बैठक में भी चर्चा होने की संभावना है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। फ्रांस का स्पष्ट मत है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन पूरी तरह स्वतंत्र और बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के जारी रहना चाहिए।

ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन साधने की कोशिश में ओमान

ओमान लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी देश रहा है, लेकिन उसके ईरान के साथ भी अच्छे राजनयिक संबंध हैं। इसी कारण वह कई मौकों पर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। हाल के दिनों में ओमान की ओर से मिले अलग-अलग संकेतों ने उसकी कूटनीतिक स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। सप्ताह की शुरुआत में ओमान और ईरान ने संयुक्त बयान जारी कर होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के संचालन और उससे जुड़े संभावित खर्चों पर बातचीत की बात कही थी। लेकिन महज दो दिन बाद ओमान ने अमेरिका और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ एक अन्य संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी भी प्रकार के टोल, शुल्क या नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशों का विरोध किया गया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्या कहा?

बहरीन की यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बैठक के दौरान सभी पक्षों ने उसी संयुक्त बयान का समर्थन किया, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी प्रकार का टोल या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अच्छी खबर है। वहीं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओमानी अधिकारियों ने निजी बातचीत में यूरोपीय प्रतिनिधियों से स्वीकार किया कि उन पर ईरान का दबाव बना हुआ है। हालिया क्षेत्रीय तनाव के दौरान ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया था और ओमान भी इस तनाव के प्रभाव से पूरी तरह अछूता नहीं रहा। अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बावजूद फारस की खाड़ी में ईरान अब भी एक मजबूत सैन्य शक्ति माना जाता है।

विशेषज्ञों ने जताई संतुलन बनाए रखने को लेकर चिंता

कुवैत विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो बदर अल-सैफ का मानना है कि मौजूदा हालात में ओमान बेहद कठिन कूटनीतिक स्थिति का सामना कर रहा है। उन्होंने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा कि ओमान लगातार ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। हालांकि अब तक यह नीति किसी हद तक सफल रही है, लेकिन यदि दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ता है या टकराव की स्थिति गहराती है, तो भविष्य में ओमान के लिए इस संतुलन को बनाए रखना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

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