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SIR में नाम हटने के बाद बड़ा एक्शन, 63 लाख राशन कार्ड रद्द करने की तैयारी; शुभेंदु सरकार का सख्त कदम

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 63 लाख राशन कार्ड रद्द करने की तैयारी की जा रही है। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने फर्जी और अपात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। खाद्य साथी और अन्नपूर्णा योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं की जांच तेज कर दी गई है, जबकि संभावित वित्तीय अनियमितताओं और धान खरीद प्रक्रिया की भी जांच के संकेत दिए गए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 06 Jun 2026 2:35:55

SIR में नाम हटने के बाद बड़ा एक्शन, 63 लाख राशन कार्ड रद्द करने की तैयारी; शुभेंदु सरकार का सख्त कदम

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने और कल्याणकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त और रियायती दरों पर अनाज प्राप्त कर रहे अपात्र और फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करने का फैसला लिया है। गुरुवार को विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि विशेष गहन समीक्षा 2026 (SIR) के आधार पर उन सभी राशन कार्डों को चिह्नित कर रद्द किया जाएगा, जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन 63 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके राशन कार्डों की भी जांच की जाएगी और उन्हें निष्क्रिय किया जाएगा। हालांकि सरकार ने मानवीय और कानूनी पहलू को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था भी जोड़ी है कि जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन किया है या संबंधित ट्रिब्यूनल में अपील लंबित है, उनके राशन कार्ड अंतिम निर्णय आने तक सक्रिय रहेंगे।

अन्नपूर्णा योजना और नए लाभार्थियों की जांच प्रक्रिया तेज

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हाल ही में शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के लिए सरकार ने नया आवेदन प्रारूप भी जारी किया है। प्रशासन को आशंका है कि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी भी आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे थे, जिनकी संख्या 30 लाख से अधिक बताई जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई अन्नपूर्णा योजना के तहत करीब दो करोड़ महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई गई है।

सरकारी अनुमान के अनुसार इस नई योजना पर राज्य को सालाना लगभग 72,000 करोड़ रुपये का खर्च वहन करना होगा, जबकि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना पर करीब 30,000 करोड़ रुपये वार्षिक खर्च आता था। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य की आर्थिक स्थिति इस समय दबाव में है और तत्काल राजस्व बढ़ाना संभव नहीं है, ऐसे में अनावश्यक लाभार्थियों और फंड लीकेज को रोकना अनिवार्य हो गया है।

15,000 करोड़ रुपये की संभावित लीकेज रोकने की तैयारी

अधिकारियों का कहना है कि खाद्य साथी योजना के तहत हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपये का व्यय होता है, जिसके जरिए करीब दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जाता है और किसानों से सीधे धान की खरीद भी की जाती है। सरकार को आशंका है कि पिछले टीएमसी शासनकाल में इन योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।

इसी कारण राज्य में सभी राशन कार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि वास्तविक और अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा सके और सिस्टम में मौजूद लीकेज को रोका जा सके। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक जरूरतमंदों तक ही लाभ पहुंचेगा।

सत्यापन की पूरी प्रक्रिया तय, घर-घर जांच होगी


राज्य के सभी सब-डिविजनल अधिकारियों (SDO) और ब्लॉक डेवलपमेंट अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से हटाए गए मतदाताओं की सूची खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षकों को सौंपें। इसके बाद विभागीय टीमें उन सभी लोगों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगी जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया में हटाए गए हैं।

सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्र पाए गए लाभार्थियों के राशन कार्ड तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए जाएंगे। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है और इसे 15 जून 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

धान खरीद प्रक्रिया और संभावित घोटाले की भी जांच

सरकार अब केवल राशन कार्ड सत्यापन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि टीएमसी शासनकाल के दौरान हुई धान खरीद प्रक्रिया की भी विस्तृत जांच की तैयारी कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने औसतन 55 लाख टन से अधिक धान खरीद का रिकॉर्ड दिखाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में कई विसंगतियां सामने आई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि धान को राइस मिलों में भेजने के बाद उसका एक बड़ा हिस्सा वापस राज्य के रिकॉर्ड में नहीं दिखता, जिससे संदेह पैदा होता है कि कहीं यह पूरा मामला कागजी हेरफेर का हिस्सा तो नहीं है। अब इसकी गहन जांच की जाएगी कि क्या वास्तव में उतनी मात्रा में धान की खरीद हुई थी या यह केवल रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का खेल था।

वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पश्चिम बंगाल में लगभग 6.01 करोड़ लोगों को सब्सिडी वाला अनाज उपलब्ध कराती है, जबकि राज्य सरकार अतिरिक्त दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है। नई सरकार अब यह भी जांच रही है कि इन अतिरिक्त लाभार्थियों में कितने वास्तव में पात्र हैं और कितने सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। धान खरीद घोटाले की औपचारिक जांच जल्द शुरू होने की संभावना है।

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